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जेलों की क्यों फूलने लगी सांसे, बंदियों के लिए नहीं रही जगह



चित्तौडग़ढ़. जिला कारागृह सहित कपासन, निम्बाहेड़ा और बेगूं उप कारागृह की क्षमता से अधिक बंदियों के चलते सांसें फूल गई है। बंदियों को कारागृह में रखना भी जेल प्रशासन की मजबूरी बन गई है। चित्तौडग़ढ़ मुख्यालय स्थित जिला कारागृह की क्षमता ३३८ बंदी रखने की है, इसके मुकाबले कारागृह में ३७५ बंदी हैं। कई बार तो यह संख्या चार सौ तक भी पहुंच चुकी है। जेल में दुष्कर्म के आरोप में ६० बंदी बंद है, जो कुल बंदियों का सोलह प्रतिशत है। इन ६० बंदियों में से ४० बंदी ऐसे हैं, जिनके खिलाफ पोक्सो एक्ट में न्यायालय में मामले विचाराधीन है। उप जेल कपासन करीब चालीस साल पहले बनी थी। इस जेल की क्षमता ३० बंदी रखने की है, इसके मुकाबले इसमें ३५ बंदी है। उप जेल बेगूं की क्षमता ४० बंदी रखने की है और इसमें ५६ बंदी रखे जा रहे हैं। इनमें दो बंदी दुष्कर्म के आरोपी हैं। उप जेल निम्बाहेड़ा में ५५ बंदी रखने की क्षमता है और इसके मुकाबले ८६ बंदी रखे जा रहे हैं।
प्रदेश की ५० जेलों पर आरएसी के जवान तैनात
सरकार ने जेलों में सुरक्षा बढाने के लिए प्रदेश की चुनिन्दा पचास जेलों में आरएसी के जवान तैनात कर दिए हैं। चित्तौडग़ढ़ जिला कारागृह में आरएसी के नौ जवान व दो हैड कांस्टेबल तैनात किए गए है। इसके अलावा छह बॉर्डर होमगार्ड भी तैनात है। एक हथियारबंद जवान और एक जवान को जेल के मुख्य गेट पर तैनात किया हुआ है। शेष जवानों को जेल के चारों तरफ गश्त करते देखा जा सकता है।
खुली जेल भी हो गई खचाखच
जिला कारागृह में बनी खुली जेल में १६ बंदियों के रहने की व्यवस्था है। इसके मुकाबले यहां सत्रह बंदी रह रहे हैं। हाल ही चार और बंदियों को इस जेल में भेज दिया गया है। एक तिहाई सजा भुगतने तथा अच्छे आचरण वाले बंदी को खुली जेल में रखा जाता है। इसके और भी कई प्रावधान है, जिसमें बंदी शारीरिक रूप से सक्षम होना चहिए। बंदी की आयु २५ वर्ष से कम व ६० साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। जेलर दुल्हेसिंह ने बताया कि हाल ही गंगानगर से एक दंपती व बीकानेर से दो सजायाप्ता बंदियों को चित्तौडग़ढ़ की खुली जेल में भेजा गया है। चित्तौड़ की खुली जेल में अब और बंदियों को रखने के लिए एक भी आवास नहीं बचा है।

 



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