झालावाड़./ हरिसिंह गुर्जर. राजकीय विद्यालयों में प्रवेशोत्सव का दूसरा चरण शुरू हो गया है। तो इधर राजकीय विद्यालय में पढऩे आने वाले बच्चों को अब किसी सूरत में नहीं लगेगा कि वह सरकारी स्कूल में अध्ययन कर रहे हैं। अब प्राथमिक शिक्षा के सभी सरकारी विद्यालयों में नवाचार कर शिक्षा के स्तर को सुधारने के साथ ही बच्चों में सर्र्वांगिण विकास करने का प्रयास किया गया है। प्राथमिक शिक्षा के बच्चों की नवाचार के माध्यम से हरसंभव नींव मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
सालभर शिक्षकों का प्रशिक्षण-
शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित शिक्षक अभिनव प्रशिक्षण तथा डाइट द्वारा सत्र पर्यन्त आयोजित विभिन्न प्रशिक्षणों एवं शिक्षकों के समर्पण एवं निष्ठा से किए गए शिक्षण कार्य तथा आधुनिक शिक्षा प्रणाली का असर अब बच्चों की शैक्षिक उपलब्धियों पर दिखने लगा है। इसके चलते इस बार पांचवी बोर्ड के छात्रों की रैंक पूरे राजस्थान में दूसरी आईहै।
क्या है नया-
अब बालकों को गतिविधि आधारित शिक्षण करवाया जा रहा है तथा रटने की परम्परा को समाप्त किया जा रहा है। अब बच्चों को बहुविकल्पी वर्कशीट आधारित क्लास वर्क करवाया जाने लगा है जिसका व्यवस्थित रिकार्ड पोर्ट फोलियो में संधारित किया जाता है। इसके बाद प्रत्येक योगात्मक आकलन के बाद उसे अभिभावकों के साथ शेयर किया जाता है और पोर्ट फोलियो की वर्कशीट पर उनके हस्ताक्षर लिए जाते हैं।
विद्यालय सौंदर्यीकरण-
विद्यालय भवन पर रंग-रोगन कर आकर्षक बनाया जा रहा है। छोटे बच्चों की कक्षा में सुन्दर विषयवार भित्ति चित्र बनाए गए हैं । ऐसे कक्षों को एबीएल कक्ष ( एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग कक्ष )बनाए जा रहे हंै। जहां बच्चों के खिलौने, एबीएल किट, शतरंज एवं रिंग की व्यवस्थाएं हैं ताकि खेल-खेल में छात्रों को शिक्षा दी जा सके। बच्चों की अभिव्यक्ति को मुखरित करने के लिए भित्ति पत्रिका का प्लेटफार्म उपलब्ध करवाया जा रहा है।
यह है एसआईक्यूई-
स्टेट इनीशिएटीव फॉर क्वालिटी एज्यूकेशन (गुणवत्ता पूर्व शिक्षा के लिए राज्य की पहल) कार्यक्रम के माध्यम से भी प्राथमिक शिक्षा में सुधार आ रहा है। यह प्राथमिक शिक्षा के स्कूलों में २०१६ से लागू हुआ, लेकिन २०१७ से इसने सुचारू रूप से काम करना शुरू कर दिया था। इसी के तहत जिले में १३ स्कूलों को एसआईक्यूई सर्टीफाइड स्कूलों का प्रमाण-पत्र दिए गए है।
यह है एसआईक्यूई के उद्देश्य-
- बाल केन्द्रित शिक्षण द्वारा बालक को सीखने के पर्याप्त आवसर प्रदान करना।
- बच्चों में परीक्षा के भय को दूर करना।
- गतिविधि आधारित शिक्षण द्वारा शिक्षण-अधिगम को रूचिकर व आनंददायी बनाना।
- ज्ञान को स्थायी एवं प्रभावी बनाते हुए प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत करना।
-बच्चो में सृजनात्मकता एवं मौलिक चिंतन का विकास करना।
- बच्चों के स्तर के अनुरूप शिक्षण योजना अनुसार शिक्षण कार्य करते हुए शैक्षणिक प्रगति लाना।
-छात्रों में संज्ञानात्मक एवं व्यक्तित्व विकास के अवसर प्रदान करना।
- बालक के गुणात्मक विकास के साथ-साथ नामांकन एवं ठहराव में वृद्धि करना।
-बच्चों की प्रगति को अभिभावकों के साथ साझा करना।
प्रशिक्षण का आ रहा परिणाम-
बदलाव की बयार से आए सकारात्मक परिणामों की कडी में कक्षा 5 वीं में प्राथमिक शिक्षा अधिगम स्तर मूल्यांकन परीक्षा के 2017-8 के परीक्षा परिणाम का विश्लेषण किया गया। इसमें संपूर्ण राजस्थान में जिले का परीक्षा परिणाम उत्कृष्ट रहा है। जिले के बड़ी सं?या में छात्रों को ए,बी, सी ग्रेड मिली है। इसी के आधार पर पूरे राजस्थान में पांचवी बोर्ड में दूसरा स्थान आया है।
ऐसे रहा श्रेष्ठ परिणाम
ग्रेड अंक प्रतिशत
ए प्लस ९१-१०० ६.७९ बच्चों ने प्राप्त की
ए ७६-९० ५.७
बी ६१-७५ २.६७
सी ४१-६० ४.१३
डी ०-४० ०.१२
होगी नींव मजबूत-
प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए शिक्षको को समय-समय पर विषयवार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एसआईक्यूई के माध्यम से शिक्षण के अच्छे परिणाम आ रहे हैं। इसी की वजह से इस बार पूरे राजस्थान में जिले को पांचवी के परिणाम में दूसरी रैंक प्राप्त हुईहै।
रवीन्द्र कुमार शर्मा, उपाचार्य, डाइट,झालरापाटन





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