Breaking News
recent

बच्चियों के असली परिजन नहीं मान रही बाल कल्याण समिति, पुलिस कार्रवाई करने से क्यों हिचकिचा रही है?

राजसमंद. कार्रवाई के पचड़े में फंसे आध्यात्मिक शिक्षा केन्द्र में ६७ बालिकाओं के मिलने के मामले में पुलिस और बाल कल्याण समिति तीसरे दिन भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इस प्रकरण में दोनों की भूमिका में भी कोईतालमेल नहीं है। एक-दूसरे के पाले में गेंद डालने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस का कहना हैकि समिति की सूचना पर केवल सुरक्षा प्रदान करने का जिम्मा निभाया जा रहा है। किसी तरह की कार्रवाई में पुलिस शामिल नहीं है। पुलिस के आला अधिकारी आधिकारिक तौर पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। इधर, बाल कल्याण समिति अपने कार्रवाई पर अडिग है। बालिकाओं को उनके परिजनों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। समिति की मांग पर जयपुर से कुछ और काउंसलर शनिवार को राजसमंद आएंगे। मध्यप्रदेश और हरियाणा के बाल कल्याण आयोग को भी सूचित किया गया है। बाकी सम्बंधित जिलों की समितियों को फोन और ई-मेल के जरिये सूचनाएं भेजी हैं। पुलिस का कोईअधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।

समिति नहीं मान रही परिजन
यहां मिलने आए लोगों को समिति परिजन नहीं मान रही है। उसके मुताबिक परिजन केवल १०-१२ लोग हो सकते हैं। फिर भी मानवीय दृष्टिकोण से उन्हें मिलवाया जा रहा है। पहचान के लिए वे आधार कार्ड लेकर आ रहे हैं। किशोरियों की पहचान के कोई दस्तावेज संचालकों के पास नहीं है।

शिक्षिकाएं नहीं कर रही बातचीत
बताया गया कि लगभग १५ महिलाएं शिक्षिकाएं हैं। उनकी ओर से समिति से कोई बातचीत नहीं कर रहा है। कौन आश्रम या संस्था संचालक है, पंजीयन है या नहीं, यह जानकारी भी कोई नहीं दे रहा है। समिति का कहना है कि पुलिस ने उससे कोई जानकारी अभी तक साझा नहीं की है। दोनों की अपने-अपने स्तर पर कार्रवाई चल रही है।

अभी कुछ नही कह सकते
हमारे काउंसलर ने अभी तक बातचीत की है, जिसमें सभी ने अध्यात्म से जुड़े होने की बात कही है। बालिकाएं घर नहीं जाना चाहती है। उन्हें यहीं रहना है। अभी कुछ और पहलुओं से जांच करनी है। अभी कुछ नहीं कह सकते।
भावना पालीवाल, अध्यक्ष,
जिला बाल कल्याण समिति, राजसमंद



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.