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न कुंड मिले न खेत हरे हुए फिर भी भर गई कइयों की तिजोरी



चूरू. सरकार की ओर से कृषि को बढ़ावा देने के लिए खेतों में बनवाए जा रहे कुडों में घोटाले की जड़े गहरी होती जा रही हैं। बीनासर के बाद अब राजगढ़ तहसील की ग्राम पंचायत रामसरा ताल में कुंडों के निर्माण में बड़ा घोटाला सामने आया है। यह घोटाला वर्ष 2012 से लेकर 2014 के बीच हुआ। यह उपखंड के संबंधित अधिकारियों के ऊपर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। हालांकि मामला अब एसीबी में पहुंच चुका है जिसकी निष्पक्ष जांच हुई तो कइयों का हवालात में
जाना तय है।
एसीबी जयपुर में 29 मई 2018 को प्रकरण दर्ज किया गया। जयपुर एसीबी मुख्यालय में प्रकरण दर्ज होने के बाद जांच के लिए प्रकरण चूरू एसीबी को सौंप दिया गया। शिकायत में बताया गया है कि तत्कालीन सरपंच बृजलाल के कार्यकाल में ग्राम पंचायत के गांवों में लाभार्थियों के खेतों में जल ग्रहण कमेटी के नेतृत्व में कुंडों का निर्माण कराया गया। कागजों में 204 कुंड दिखाकर 204 कुंडों का बजट उठा लिया गया लेकिन मौके पर कई दर्जन कुंड नहीं बने हैं। शिकायतकर्ता शिकायत करते रहे और मामला यू हीं चलता रहा। दबाव पडऩे पर मार्च 2018 में राजगढ़ पंचायत समिति की ओर से गठित टीम की ओर से इसकी जांच कराई गई।
लाखों का घोटाला
जानकारी के मुताबिक प्रत्येक कुंड की लागत करीब एक लाख रुपए थी। इस हिसाब से देखा जाए तो करीब 44 लाख रुपए का गबन किया गया है। निर्माण की मजदूरी नरेगा मजदूरों के खाते से उठाई है। इसका मतलब इसमें लंबा खेल किया गया है। जानकारी के मुताबिक किसी भी सरकारी निर्माण कार्य को मनमर्जी से नहीं तोड़ा जा सकता है। इसके लिए संबंधित विभागों से अनुमति लेनी पड़ती है। लेकिन लाभार्थियों ने ऐसा नहीं किया। यह सरकार की राशि का दुरुपयोग है। ऐसे में यदि लाभार्थियों ने हकीकत में कुंडों को तोड़ा है तो उन्हे ही निर्माण की राशि वहन करनी पड़ेगी। यदि निर्माण नहीं हुआ है तो सरपंच व संबंधित जल ग्रहण समिति के पदाधिकारियों को खमियाजा भुगतना पड़ेगा।


जांच में नहीं मिले 44 कुंड
प्रकरण की जांच के लिए पंचायत प्रसार अधिकारी रामकुमार सिंह के नेतृत्व में जेईएन गोपेश कुमार, जेटीओ प्यारे लाल व रिशालसिंह की टीम बनाई गई। टीम ने मार्च 2018 में मामले की जांच की। टीम ने विभाग को जो जांच रिपोर्ट सौंपी उसमें बताया गया कि सत्यापन के दौरान मौके पर 44 लाभार्थियों के खेतों में कुंड नहीं मिले। इसके बाद शिकायतकर्ता ने तत्कालीन सरपंच बृजलाल, जलग्रहण कमेटी अध्यक्ष रामसिंह व सचिव निर्मल कुमार के खिलाफ एसीबी में परिवाद दर्ज किया गया है। इसकी जांच एसीबी के सीआई रमेश माचरा के नेतृत्व में की
जा रही।
लाभार्थियों ने दिया यह तर्क
जांच रिपोर्ट के मुताबिक लाभार्थियों ने यह तर्क दिया कि खेतों में बने कुंड खराब हो गए जो उपयोग में नहीं आ रहे थे इसलिए उन्होंने कुंड को निकाल दिया। इसके लिए लाभार्थियों को ओर से लिखित में पत्र भी दिया गया है।
कार्रवाई के लिए
भेजी रिपोर्ट
&पंचायत समिति की ओर से मामले की जांच करवाई गई है। जांच में करीब ४४ लाभार्थियों के खेतों में कुंड नहीं मिले। मामले की अग्रिम कार्रवाई के लिए अधीक्षण अभियंता कार्यालय वाटर शैड जिला परिषद चूरू को मामला भेज दिया गया है। :-देवसिंह गोदारा, एईएन, नरेगा, पंचायत समिति राजगढ़
&रामसरा ताल ग्राम पंचायत में कुंडों के निर्माण का मामला सामने आया है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक ग्राम पंचायत में ४४ कुंड नहीं मिले। कुंड नहीं बने या बनाकर तोड़ दिए गए दोनों ही अपराध हंै। उक्त कुंडों की राशि की रिकवरी के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है। इसके अलावा संबंधित पक्ष को अपनी बात रखने के लिए नोटिस दिया गया है। :-राजेन्द्र प्रसाद, एसई, वाटर शैड, जिला परिषद, चूरू
&मेरे सरपंच होते हुए 204 कुंड बने थे। लेकिन मेरे हटने के बाद कुछ किसानों ने कुंडों के खराब होने से तोड़ दिए या खेतों से निकाल दिया। इसके बाद कुछ लोग बदनाम करने की नीयत से बार-बार शिकायत कर रहे हैं और जगह-जगह मामला दर्ज करवा रहे हैं। पंचायत समिति के अधिकारी जांच करने आए थे उन्हे किसानों से मिला दिया और कुंड होने का शपथ पत्र दिलवा दिया। उनकी तरफ से कोई गलती नहीं की गई है। :-बृजलाल शर्मा, पूर्व सरपंच, रामसरा ताल, राजगढ़



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