चित्तौडग़ढ़. वन्य जीवों के संरक्षण, इकोफ्रेंडली ट्यूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सीतामाता अभयारण्य को कलात्मक रूप देने के लिए पांच दिवसीय इनवायरमेंटल आर्टिस्ट रेसिडेंसी का आयोजन किया जा रहा है। जहां देश विदेश के कलाकारो ने अपनी कलाकृति से अभ्यारण में न्यू मीडिया का परिचय दिया। इस अवसर पर पर्यावरणीय चित्रकार मुकेश शर्मा और शांति निकेतन की आर्टिस्ट अदिति सिन्हा ने लैंड आर्ट के माध्यम से जल संरक्षण को प्रदर्शित किया, मुख्यत: बारिश के पानी का संरक्षण करते हुए प्राकृतिक चीजों से लैंड आर्ट का प्रदर्शन किया।
चित्रों के माध्यम से बताया वन्यजीवों का महत्व
कला शिविर में आए वाइल्ड लाईफ फोटोग्राफर और प्रकृति प्रेमी उज्जवल दाधीच ने अतिथियो को सीतामाता की जैवविविधता और पाई जाने वाली दुर्लभ जानवरो व पक्षी प्रजातियो का अवलोकन कराया। बीएससी जीवविज्ञान तृतीय वर्ष का छात्र उज्जवल विगत ३ वर्षो से वाइल्ड लाईफ फोटोग्राफी कर रहा है। जंगलो के निरन्तर खतम होने से पशु पक्षी भी खतम हो जाते है इसलिए लोगो को जागरूक करने के लिए उज्जवल पशु-पक्षियों के क्रिया कलापो को लोगो तक चित्रो के माध्यम से पहुंचाने की कोशिश करता है और युवा पीढ़ी को अधिक से अधिक जुडऩे का भी आव्हान किया।
पेपर पल्प से दी वन्यजीवों को नई आकृति
बांग्लादेश से आई दीनार सुल्ताना ने अपने वैचारिक कला के माध्यम से पेपर पल्प से कीड़े मकोड़े, जानवरो और फलो की आकृतियां बना रही है। उसका कहना है कि न्यू मीडिया का परिचय देने का यह माध्यम भी उत्तम है।
सुल्ताना इन आकृतियो को पेड़ो पर लगाकर जीव प्राणीयो को आकृर्षित करेगी। इससे पूर्व भी दीनार दो बार चित्तौड़ आ चुकी है और यहां के वातावरण को पंसद भी करती है।
जयपुर के विशाल वाजपेयी ने स्टोन पर कार्य करते हुए हिरण की मूर्ति बनाई है। विशाल का मानना है कि मूर्ति बनाने से अधिक उनमें भावनाओ को प्रदर्शित करना मुश्किल का काम है। कलाकार के असली भाव उनके द्वारा किए गए कार्यो में दिखता है। चित्तौड़ में पहली बार आए वाजपेयी द्वारा पांच फीट की सीतामाता की मूर्ति बनाई जाएगी जिसे दमदमा गेट के मुख्य द्वार पर स्थापित किया जाएगा। उन्हे हर मटेरियल में कार्य करना अच्छा लगता है। जयपुर में उनका खुद का स्टोडियो है और उनके पिता द्वारा भी स्टोन का कार्य किया जाता है जिस कारण बचपन से उन्हें इस ओर रूचि है।
इसी तरह महाराष्ट्र की शिरीन शेख ने दमदमा गेट पर विलुप्त जानवरो की कलाकृति की। शेख का कहना है कि यदि हमने अपनी जिम्मेदारी को निभाना बंद कर दिया, पशु पक्षियों का ध्यान नहीं रखा तो वह केवल दीवारो की शान बन कर रह जाएगे। कम्प्यूटर सांइस में मास्टर करने वाली शिरीन ने माता पिता के इच्छानुरूप यह कोर्स तो कर लिया पर बचपन से अपने चित्रकारी के शौक को मन से निकाल नहीं पाई और माता पिता ने शेख के इच्छा का मान रखते हुए उन्हे इस ओर बढऩे दिया।





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