आषाढ़ मास की पूर्णिमा के बाद शनिवार से सावन मास का प्रारंभ हो जाएगा। सावन मास में भगवान शिव की भक्ति व आराधना का विशेष महत्व रहता है। इसके चलते शहर के मंगल विहार स्थित शिव मंदिर, होपसर्कस स्थित कैलाश मंदिर, मालन की गली स्थित शिवालय, अट्टा मंदिर के समीप स्थित नागेश्वर मंदिर, सौनावां की डूंगरी स्थित लंबोदर महादेव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में भगवान की विशेष झांकियां सजाई जाएगी। इस मास में शिवजी का पंचामृत, धतूरे व पुष्प आदि से पूजन किया जाता है। सावन मास में सावन के सोलह सोमवार भी प्रारंभ हो जाते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को मनोकामना पूर्ति के लिए श्रद्धालु व्रत रखते हैं। विशेष तौर से अविवाहित युवतियां मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।
प्रत्येक सोमवार त्रिपोलिया में सजेगी झांकी
शहर के त्रिपोलिया स्थित शिवालय में प्रत्येक सोमवार की शाम को भगवान शिव का श्रृंगार कर विशेष झांकी सजाई जाएगी। मंदिर के महंत पंडित जितेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रत्येक सोमवार को बैंडवादन के साथ आरती जाती है। उन्होंने बताया कि सावन मास की महाशिवरात्रि को भगवान शिव का कावड़ से लाए गए गंगा जल से अभिषेक किया जाता है। इसके चलते शहर में जगह जगह पर कावड़ शिविर भी लगाए जाएंगे।
भगवान के साथ हरियाली की भी होगी पूजा
सावन का मतलब केवल हरियाली तीज नहीं होना चाहिए। आप चाहते हैं कि ये सावन सदा ऐसे ही हरा भरा रहे तो इसके लिए जरुरी है आप जहां रहते हैं वहां एक पौधा अवश्य ही लगाएं और पौधे लगाने के लिए और लोगों को भी प्रेरित करें। यदि सभी लोग अपने और अपने परिजनों के साथ मिलकर अपने क्षेत्र में पौधे लगाएंगे तो सारा शहर अपने आप ग्रीन अलवर और क्लीन अलवर में बदल जाएगा। एक व्यक्ति को एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए, ताकि प्रकृति की हरियाली बची रहे और पर्यावरण संतुलन नहीं
बिगड़ सके।





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