जैसलमेर. विद्यार्थी यदि पढ़ाई में मन नहीं लगाए तो परीक्षा के परिणाम में उसे अनुत्तीर्ण होने की सजा झेलनी पड़ती है, लेकिन अपने विद्यार्थियों की पढ़ाई में रुचि नहीं लेने वाले शिक्षकों को विद्यार्थियों के अनुत्तीर्ण होने पर महज कागजी नोटिस ही थमाए जाते हैं। नोटिस का जवाब देकर ऐसे शिक्षक साफ बचकर निकल जाते हैं। दरअसल शिक्षक विभाग की परिणाम आधारित व्यवस्था नख-दंत विहिन बनी हुई है। यही कारण है कि जिन विद्यालयों अथवा शिक्षकों का 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम लगातार निम्न स्तरीय रहा है, वे इसे लेकर कतई चिंतित नजर नहीं आते।इस बार भी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में जैसलमेर जिले के कई विद्यालयों का परिणाम शोचनीय आया है। ऐसे विद्यालयों में ग्रामीण क्ष् ोत्रों के साथ जिला मुख्यालय के उच्च माध्यमिक विद्यालय भी शामिल हैं।
यह है हकीकत
-पिछले अर्से जारी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षाओं के परिणामों में समग्र रूप से जैसलमेर जिला राज्य औसत से कतई कमजोर नहीं रहा, लेकिन कई विद्यालयों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा।
-जिले में 10वीं कक्षा में 6 46 9 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे थे, उनमें से 5104 उत्तीर्ण हुए।
-12वीं कला वर्ग में 3154 में 28 6 1, विज्ञान में 492 में 36 2 और वाणिज्य में 113 में 8 7 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं।
-जैसलमेर स्थित ऐतिहासिक अमर शहीद सागरमल गोपा राउमावि में 10वीं का परीक्षा परिणाम महज 46 .15 प्रतिशत रहा।
-यहां परीक्षा में बैठे 78 में 36 विद्यार्थी ही पास हुए, जबकि मुख्यालय स्थित राजकीय बालिका राउमावि में यह परिणाम और भी कम 42 प्रतिशत रहा।
-स्कूल में 10वीं की परीक्षा 133 छात्राओं ने दी और केवल 56 ही पास हो सकी।
यहां यह है हाल
ग्रामीण क्षेत्रों में जेठवाई विद्यालय में परिणाम 22 व धऊवा में 0 प्रतिशत, अड़बाला में 7 में से 1, फतेहगढ़ में 26 में से 10 विद्यार्थी पास हुए।
यह है विभागीय व्यवस्था
जानकारी के अनुसार जिस विद्यालय का परिणाम निम्न रहता है, उसके संस्था प्रधान व व्याख्याताओं को शिक्षा निदेशालय नोटिस जारी करता है, जबकि द्वितीय श्रेणी के अध्यापकों को उपनिदेशक कार्यालय व तृतीय श्रेणी के षिक्ष् ाकों को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय नोटिस देकर कारण पूछता है। बताया जाता है कि संबंधित संस्था प्रधान अथवा शिक्षक नोटिस का जवाब दे देते हैं। इसके बाद उनके खिलाफ आगे कोई कार्रवाई पहले साल नहीं होती। दूसरे साल भी परिणाम खराब रहे तब भी सवाल-जवाब के स्तर तक की कार्रवाई होती है। लगातार तीसरे साल प्रदर्शन खराब रहने पर इंक्रीमेंट रोकने की कार्रवाई का प्रावधान है। जिले में अभी तक षायद ही ऐसी कार्रवाई की गई है। प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के चलते शिक्षकों में नहीं के बराबर भय रह गया है। इसके अलावा स्टाफ की कमी से लेकर अन्यत्र ड्यूटी या चार्ज मिले होने जैसे कारण बताकर गुरुजन आसानी से छूट हासिल कर लेते हैं।
फैक्ट फाइल -
- 90 प्रतिशत या उससे अधिक परिणाम माना जाता है श्रेष्ठ
-50 प्रतिशत या कम परिणाम का आंकन 10वीं में निम्न श्रेणी
-6 0 प्रतिशत या कम विद्यार्थी 12वीं में पास हो तो माना जाता है निम्न
जवाब तलब किया जाता है
माध्यमिक स्तर की परीक्षाओं में निम्न परिणाम आने पर विभाग संबंधित शिक्षकों से जवाब तलब करता है।उनसे व्यक्तिगत पूछताछ भी होती है। उनका पक्ष सुना जाता है।लगातार तीन साल परिणाम खराब रहने पर इंक्रीमेंट रोकने का प्रावधान है।
-मन्नाराम मीना, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक, जैसलमेर





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