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आज सुबह भी नहीं पहुंच पाई शहीद की पार्थिव देह, तीन माह की पुत्री को छोड़ गए अकेला, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

जयपुर। भारतीय सेना के जवान शहीद मुकुट बिहारी की पार्थिव देह आज सुबह जयपुर एयरपोर्ट पर नहीं पहुंच पाई। कश्मीर घाटी में मौसम खराब होने की वजह से सेना का विमान आज सुबह श्रीनगर से उड़ान नहीं भर पाया। शहीद मुकुट बिहारी मीणा की पार्थिव देह को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए सेना के जवानों ने सुबह से ही तैयारियां शुरू कर दी। सेना के जवान शहीद को सलामी देने के लिए अभ्यास करते नजर आए। वहीं, पुष्प चक्र भी एयरपोर्ट पर लाए गए।

जानकारी के अनुसार शहीद मुकुट बिहारी को जयपुर एयरपोर्ट पर सैन्य सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई। सप्त शक्ति कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिस मैथसन ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे। शहीद की पार्थिव देह को शहीद के पैतृक गांव लडानिया ले जाया जाएगा। लडानिया गांव झालावाड़ जिले की खानपुर तहसील का हिस्सा है।


गौरतलब है कि श्रीनगर कुपवाड़ा के जंगलों में छिपे आतंकियों की तलाश में सुरक्षाबलों की ओर से शुरू किए गए सर्च अभियान के दौरान मुठभेड़ में झालावाड़ जिले के खानपुर तहसील के लड़ानिया गांव का सपूत कमांडो मुकुट बिहारी मीना शहीद हो गए और एक अन्य कमांडो घायल हो गया। जैसे ही मीना के शहीद होने की सूचना गांव में पहुंची गांव में सुबह से ही ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी है। शहीद के परिवार में है पत्नी अंजना मीणा और पिता जगननाथ मीणा हैं।


जिले में खानपुर तहसील से देश की माटी के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले यह दूसरे शहीद है। इससे पहले बड़बेली गांव के राजेन्द्र प्रसाद गुर्जर पजांब के मुख्यंमंत्री बेअंतसिंह की सुरक्षा कमांड़ो में आंतवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे।

तीन माह की पुत्री
दो महीने पहले ही अपनी पुत्री से मिलकर गए मुकुट बिहारी मीणा को अब तीन माह की पुत्री आरू अब कभी नहीं देख पाएगी। हालांकि शहीद की पत्नी अंजना मीणा को अभी पति के शहीद होने की सूचना नहीं दी गई है। शहीद 18 मई 2018 को अपने चाचा की बेटी मिनाक्षी व बचपन के दोस्त सुरेन्द्र मीणा की शादी में आए थे। अभी दो दिन पहले अपने भाई शभुदयाल से बात हुई थी, रक्षाबंधन पर आने के लिए बोला था।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
हालांकि परिजनों को बताया यह गया है कि उनका लाल सेना में घायल हो गया है। शहीद की बहिने कमलेश, सुगना, कालीबाई व भाई शंभुदयाल व पिता का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा है। परिजन बार-बार पूछ रहे है कि म्हाको भायो छोगो छ न कोई कांई तो बताओ रे...। यह कह कर बार-बार रोने लगते हैं। वहीं ग्रामीण उनको ढांढ़स बंधा रहे हैं।



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