हिण्डौनसिटी. वन विभाग के अधीन वन क्षेत्र की पहाडिय़ों को अवैध खनन कर खोखला किया जा रहा है। पहाड़ों पर हथोड़ा और कंप्रेशर के माध्यम से धडल्ले से अवैध खनन हो रहा है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे अवैध खनन करने वालों पर नकेल कसने की प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। यही कारण है कि पहाड़ों से अवैध खनन कर मोर्रम, खंडे आदि पत्थरों को थाने और वन विभाग की चौकियों के सामने से बेखौंफ से लाया जा रहा है। इस संबंध में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे विभिन्न संगठनों ने कलक्टर से अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की है।
क्षेत्र के खोहरा, घूसेटी, खरैटा, चिनायटा, कोटरी आदि डांग इलाके में वन विभाग के पहाड़ों पर अवैध खनन किया जा रहा है, जहां हर दिन सुबह 5 से 10 बजे तथा शाम को 4 से सात बजे तक अवैध खनन करने वालों का जमावड़ा बना रहता है। हथोडा, सब्बलों के साथ ट्रेक्टरों में लगे कंप्रेशरों से पहाड़ों को खोखला किया जा रहा है। इन पहाड़ों से अवैध खनन कर हर दिन सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से खंडे, पट्टियां और मोर्रम उपखंड मुख्यालय पर बिक्री के लाए जा रहे हैं, जिसके प्रति जिम्मेदार वन विभाग, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की ओर से रोकथाम की प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
खास बात यह है कि अवैध खनन कर लाए जा रहे मोरम, खंडे आदि से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मुख्य रास्तों से पुलिस थानों व वन विभाग की चौकियों के आगे से निकल रही हैं। इसके बाद भी विभाग की ओर से नकेल कसने की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
नहीं छोड़े कैंचमेंट एरिया के पहाड़
अवैध खनन करने वालों ने जगर बांध और जलसेन के कैचमेंट एरिया के पहाड़ भी नहीं छोड़े हैं। पौधरोपण कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वन विभाग द्वारा चिह्नित किए गए पहाड़ों से हर दिन मोर्रम और खंडों का अवैध खनन किया जा रहा है। अवैध खनन से जगर बांध और जलसेन में पानी आवक तो प्रभावित होगी ही, साथ ही पर्यावरणा संतुलन बिगडऩे से आसपास के निवासी लोगों को सेहत संबंधी नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है।
अभियान चलाकर रोकेंग अवैध खनन-
वन विभाग की ओर से शीघ्र ही अवैध खनन रोकने के लिए अभियान चलाया जाएगा और अवैध खनन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गत वर्ष विभाग ने अवैध खनन करने वालों से ३० लाख का जुर्माना वसूल किया था। इस बार वन्य जीव गणना आदि अतिरिक्त कार्य आने से वनकर्मी अवैध खनन पर प्रभावी रोकथाम नहीं कर पाए हैं, लेकिन अब शीघ्र ही इस संबंध में प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
- आरपी शर्मा, रेंजर वन विभाग, हिण्डौनसिटी।





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