निखिल स्वामी/बीकानेर. इन दिनों बाजारों में बर्तन की दुकानों पर भीड़ नजर आ रही है। यह भीड़ किसी त्योहार व पर्व के उपलक्ष्य में खरीदारी करने वालों की नहीं है, बल्कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की है। सरकार की अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत प्रदेश के सभी स्कूलों में दो जुलाई से विद्यार्थियों को दूध दिया जाएगा। इसके लिए शिक्षक दूध के लिए बर्तन खरीद रहे हैं।
इससे बाजारों में बर्तनों का कारोबार भी बढ़ गया है। जब से दूध योजना के आदेश आए हैं, तब से स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था भी गड़बड़ा गई है। आमतौर पर इन दिनों में बर्तनों की मांग व खरीदारी कम होती है, लेकिन सरकारी स्कूलों में शुरू होने वाली दूध योजना के लिए बड़ी संख्या में बर्तन खरीदे जा रहे हैं। शिक्षक ही इस काम में लगे हुए हैं।
शिक्षक बर्तन और दूध की मात्रा तथा जांच के लिए लेक्टोमीटर की खरीदारी करने में व्यस्त है। जब से अन्नपूर्णा दूध योजना का आदेश स्कूलों में पहुंचा है, उसी दिन से शिक्षक बाजारों में बर्तनों के मोलभाव करते नजर आ रहे है। अब शिक्षक दूध की योजना को पूरा करने में लगे हुए हैं। वे न तो बच्चों की पढ़ाई है और ना ही रिजल्ट के प्रति गंभीर हैं।
बजट में नहीं आ रहे बर्तन
सरकार ने सभी स्कूलों के लिए छात्रों के अनुपात में गिलास, भगोना, टंकी, जग और छलनी खरीदने के लिए बजट तय किया है, लेकिन ये बर्तन इस बजट में नहीं आ रहे हैं। बीकानेर के ठठेरा बाजार, बड़ा बाजार, कोयला गली सहित अन्य जगह बर्तनों की डिमांड बढ़ गई और कई दुकानों में तो गिलास व जग आदि खत्म हो गए है। कुछ जगह टंकी व भगोना नहीं होने से शिक्षक दूसरी दुकानों पर जाकर मोलभाव कर रहे है। इस डिमांड को देखते हुए दुकानदारों ने भी बर्तनों की दरें बढ़ा दी हैं।





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