Breaking News
recent

नवजातों को नहीं मिल रहे बेबी किट, नवाचार कर भूल गया चिकित्सा विभाग

चूरू.

 

जिले में शिशु मृत्युदर पर अंकुश लगाने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से 2015में जन्मजात शिशुओं को बेबीकिट देने का नवाचार किया गया था। लेकिन चिकित्सा विभाग का यह नवाचार महज नवाचार ही बनकर रह गया। जनवरी2015में शुरू किया गया यह नवाचार2016 के आखिरी तक बंद हो गया। इसके लिए रुपए रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से दिए जाते थे। सोसायटी में दानदाता रुपए जमा कराते थे। लेकिन चिकित्सा विभाग के अधिकारी इस नवाचार को भूल गए और जिला अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में फिर से बच्चों को पुराने कपड़ों में लेने का चलन शुरू हो गया। यह नवाचार जिला अस्पताल, सरदारशहर, राजगढ़ व तारानगर सीएचसी सहित कुछ अन्य अस्पतालों में शुरू हो गया था। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में करीब प्रतिवर्ष 36हजार शिशु जन्म लेते हैं। एक किट करीब100 रुपए की पड़ती है। ऐसे में सभी शिशुओं को बेबीकिट देने के लिए एक साल में ३६ लाख रुपए की जरूरत पड़ सकती है।

 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

 

डीबीएच के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डा. इकराम हुसैन ने बताया कि बेबी किट से नवजातों में संक्रमण होने की संभावन नहीं रहती है, जबकि घरेलू कपड़ों में संक्रमण की संभावना अधिक रहती है। बेबीकिट मुलायम होने से शिशुओं के लिए आरामदयक भी होते हैं। इसके लिए दानादाता व प्रशासन पहल करे तो यह नवजातों के लिए फायदेमंद होगा। यह करीब तीन सौ रुपए के आस-पास मिलती है। इसमें मेडिकेटेड तौलियां, नैपी, चद्दर व टोपी आदि शामिल थे।
जानकारी के मुताबिक भरतिया अस्पताल में प्रत्येक महीने करीब ६०० सौ नवजात पैदा होते हैं। ऐसे में जिला अस्पताल के लिए प्रत्येक महीने में बेबीकिट के लिए 60 हजार रुपए लगेंगे। यह नवाचार दानदाताओं को भरोसे शुरू किया गया था लेकिन बाद में दानदाता भी मुह मोड लिए जिसका नतीजा एक अच्छी पहल बंद हो गई। जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डा. सुनील जांदू ने बताया कि दानदाता व रोडक्रॉस सोसायटी पहले कर तो यह योजना चल सकती है।

 

तो नहीं होगी बेबी किट की कमी
गौरतलब है कि जल स्वावलंबन के लिए जिले में दानदाताओं ने दो साल में करीब एक करोड़ रुपए दिया। यदि इसी तरह दानदाता बेबीकिट के लिए भी सहयोग करें तो पूरे जिले में जन्म लेने वाले नवजातों को बेबीकिट आसानी से मुहैया कराया जा सकता है। जानकारों का कहना है कि इसके लिए सरकार को भी कुछ बजट आवंटित करना चाहिए। इससे यह काम आसानी से हो सकेगा।

 

इनका कहना

 

इस सुविधा को शुरू करने के लिए फिर से प्रायस किए जाएंगे। दानदाताओं को इसके लिए तैयार किया जाएगा। सरकार को भी पत्र भेजकर इसके लिए बजट का प्रावधान करने की मांग की जाएगी।
डा. मनोज शर्मा, सीएमएचओ, चूरू



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.