अलवर. गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के रकबर की मौत पुलिस कस्टडी में होना मानने के बाद रामगढ़ विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने मामले में गिरफ्तार गोरक्षकों को रिहा करने की मांग की है।
विधायक ने कहा कि घटना के अगले दिन से ही वे बार-बार कह रहे थे कि रकबर को ग्रामीणों ने नहीं मारा। उसकी मौत पुलिस कस्टडी में हुई है। तबीयत खराब होने पर पुलिस को रकबर को अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया।
उन्होंने कहा कि गृहमंत्री के दौरे व जांच मेें पुलिस की लापरवाही व उनकी कस्टडी में मौत साबित होने के बाद गिरफ्तार गोरक्षकों को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने रकबर के साथी असलम को भी तुरन्त गिरफ्तार किए जाने की मांग की।
मामले में रामगढ़ विधायक ज्ञानदेव आहूजा का कहना है कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि पिटाई करने वाले उनके आदमी थे। रकबर की पिटाई करने वाली गांव की जनता थी। यदि वह गोतस्कर नहीं था तो रात में क्यों जा रहा था। सीधे-सीधे रास्ते से जाता। कच्चे-पक्के रास्तों से चोरों की तरह जाने की क्या जरूरत थी। उसके खिलाफ पूर्व में भी गोतस्करी के मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि ये भारत मां का देश है। गोमाता पर कोई अटैक करेगा तो जनता को गुस्सा आएगा। गांव की जनता ने उसे इनता नहीं पीटा, कि उसकी मौत हो जाती। उसकी मौत पुलिस कस्टडी में हुई है। पुलिस ने उसे समय पर अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया। उसकी मौत के लिए पुलिस जिम्मेदार है।
पुलिस करे लोकेशन की जांच
मेव पंचायत के संरक्षक शेर मोहम्मद ने ललावंडी में युवक की पीट-पीटकर हत्या के लिए पुलिस के साथ-साथ खुद को घटना का चश्मदीद गवाह बताने वाले नवल किशोर शर्मा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि नवल मामले का सबसे बड़ा मुल्जिम है। वह घटना के समय खेत में छिपा बैठा था। उनके पास इसके पर्याप्त सबूत हैं। रकबर के साथी असलम ने भी अपने बयानों में यह बात कही है। पुलिस नवल की लोकेशन की जांच करे और यह पता लगाए कि घटना के वक्त वह कहां था, तो सारी सच्चाई खुद व खुद सामने आ जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले के दूसरे मुल्जिम रामगढ़ विधायक ज्ञानदेव आहूजा हैं, जो कह रहे हैं कि पीटने वाले मेरे लोग हैं। उन्होंने तो केवल पीटा था। मारने वाली तो पुलिस है। ऐसे में वे सीधे-सीधे 120 बी के मुल्जिम बनते हैं। उन्होंने कहा कि घटना के बाद मुकदमेे को घुमाने का खेल चल रहा है।





No comments:
Post a Comment