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जेल वार्ड पर ताला, गैलेरी में चढ़ाया बंदी के ग्लूकोज

 

 

पाली . शुक्रवार रात को पुलिस के दो जवान जेल से एक कैदी की तबीयत बिगडऩे के कारण उसे उपचार के लिए अस्पताल लाए थे। मरीज को अफीम के नशे का आदी होने के कारण उसे मनोरोग व चर्म रोग वार्ड में भर्ती करवाया गया। शनिवार सुबह वार्ड में आए चिकित्साकर्मियों ने पुलिस के जवानों को अपने जूते वार्ड के बाहर खोलकर आने को कहा। लेकिन, पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी पर होने का हवाला देकर जूते खोलने से इनकार कर दिया। इस बात को लेकर दोनों के बीच काफी तीखी तकरार हुई। इस बीच चिकित्साकर्मियों ने वार्ड में जूतों से इंफेक्शन फैलने का कहकर मरीज को ही बाहर शिफ्ट करने का कह दिया। इसके बाद पुलिस के जवान कैदी मरीज को लेकर वार्ड से बाहर आ गए और सामने दीवार पर लिटाकर ही उसके ड्रिप चढ़वाई।

जेल वार्ड नहीं आ रहा काम

अस्पताल में मेडिकल सुविधा विस्तार के चलते सभी वार्डों के नवीनीकरण का कार्य चल रहा है। इसी के तहत जेल वार्ड के भी नवीनीकरण के लिए अंदर से तोडफ़ोड़ कर रखी है। इसी कारण पिछले तीन माह से पुलिस कैदियों को उपचार के लिए लेकर आती तो है। लेकिन, उन्हें आम मरीजों के बीच वार्ड में ही भर्ती करवाना पड़ रहा है।

 

कैदी के भागने की आशंका

कैदियों को उपचार के लिए लाने के बाद कैदी को सामान्य वार्ड में भर्ती कर देने से पुलिस की समस्या काफी बढ़ जाती है। जेल वार्ड में तो कैदी के पास किसी भी आम आम आदमी को नहीं जाने दिया जाता है। लेकिन, सामान्य वार्ड में तो आने वाले लोग कैदी के आस-पास ही रहते हैं। अनहोनी की आशंका को लेकर पुलिस के जवान हर समय कैदी के पास ही खड़े रहते हैं।

वार्ड में इंफेक्शन फैलने का खतरा

चिकित्साकर्मियों ने बताया कि वर्तमान में मनोरोग, चर्म रोग, ईएनटी व आंखों के रोगों से संबंधित मरीजों को ऑपरेशन के बाद एक ही वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। ऐसे में वार्ड में इंफेक्शन का खतरा नहीं हो, इसके लिए साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखा जाता है। इसी कारण से वार्ड में आने वाले मरीजों व परिजनों के जूते भी वार्ड से बाहर खुलवाए जाते हैं।

खुलवा देंगे जेल वाड
- संक्रमण के खतरे को लेकर पुलिसकर्मियों को जूते बाहर खोलने का कहा गया था। इस वार्ड में ऑपरेशन के बाद मरीजों को रखा जाता है। मैंने ठेकेदार को सोमवार को जेल वार्ड तैयार कर खोलने के निर्देश दिए हैं। ठेकेदार द्वारा सोमवार को जेल वार्ड नहीं खोला जाता है तो जिला कलक्टर को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

- डॉ. एमएस राजपुरोहित, अधीक्षक, बांगड़ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, पाली



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