अजमेर
मोबाइल क्रांति के बाद देश में नित नए बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कभी यह टेलीफोन की तरह महज एकदूसरे से बातचीत करने का उपकरण था। तकनीकी विशेषज्ञों के कमाल ने इसे कम्प्यूटर और टीवी तब्दील कर दिया। अब यह सोशल मीडिया का भी अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
शुरुआती दौर में सोशल मीडिया युवा वर्ग में जबरदस्त लोकप्रिय हुआ। फेसबुक और वाट्सएप्प के बाद पूरी दुनिया में नई क्रांति का सूत्रपात हो गया। अन्ना हजारे के लोकपाल और दिल्ली के निर्भया कांड आंदोलन को जनता तक पहुंचाने में सोशल मीडिया की अहम भूमिका रही। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी इसका डंका बजा।तकनीकी और हाइटेक युग में सोशल मीडिया की अहमियत को कतई नकारा नहीं जा सकता।
यूं बढ़ी समस्याएं
सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में इससे दूर रहना भी मुश्किल है। लेकिन वक्त के साथ इसको कई चुनौतियों और समस्याओं ने घेरना शुरू कर दिया है। किसी घटना विशेष का वीडियो या संदेश वायरल होते ही अनर्गल टीका-टिप्पणियां की बाढ़ आ जाती है। उसके पीछे की सच्चाई जानने की कोशिश नही होती। फर्जी संदेश की हकीकत परखे बिना लोग किसी की बेरहमी से पिटाई और हत्या जैसे जघन्य अपराध करने से नहीं चूक रहे है। खासतौर पर कई प्रदेशों में तो संदेशों की करतूत से दंगे तक भड़क चुके हैं। कई बार हवाई जहाज, ट्रेन, बस में बम की होने की सूचनाएं देकर लोगों की जान सांसत में डाल दी जाती है।
परीक्षाओं से ही खिलवाड़
सोशल मीडिया ने सबसे ज्यादा असर वार्षिक और प्रतियोगी परीक्षाओं पर डाला है। कभी सीबीएसई की दसवीं-बारहवीं तो कभी यूपीएससी, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, कांस्टेबल, सेना और अन्य भर्ती संस्थाओं को इसका खामियाजा उठाना पड़ा है। सोशल मीडिया पर कोई भी पुराना प्रश्नपत्र डालकर पेपर लीक होने की अफवाह फैला दी जाती है। असामाजिक तत्व और अनपढ़ लोगमनमर्जी के संदेश वायरल कर रहे हैं। यह एक समूह से दूसरे समूह तक होते-होते लाखों लोगों तक पहुंचकर बड़े घटनाक्रम में तब्दील हो रहा है। कई मामले तो हास्यास्प्रद दिखते हैं। लोग रोजमर्रा के खान-पान से लेकर, खरीददारी जैसे बातें भी वायरल करने से नहीं चूकते।
परखें फिर करें टिप्पणी
अंधविश्वास, जादू, टोने-टोटके के संदेश भी देखे जा सकते हैं। एकबारगी तो लगता है, कि शिक्षित समाज ने जिन्हें नजरअंदाज कर दिया था वह सोशल मीडिया के प्रार्दुभाव के साथ पुर्नस्थापित होने लगे हैं। सोशल मीडिया की वजह से उपजती समस्याओं ने सरकारों की चिंता भी बढ़ाई है। सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग किसी भी देश के विकास को पंख लगा सकता है। जबकि दुष्प्रभाव पूरी दुनिया को गर्त में डाल सकते हैं। सोशल मीडिया पर आंख मंूद कर तुरन्त विश्वास करने से पहले उसकी हकीकत का भी जांचा-परखा जाना चाहिए। इससे बेवजह की कई मुसीबतों, समस्याओं से बचा जा सकता है।





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