चूरू.
मेडिकल कॉलेज से जुड़े राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल में ब्लड जांच से संबंधित फुल्ली ऑटो बायोकमेस्ट्री एनालाइजर चार दिनों से खराब है। इसकेे कारण मरीजों को करीब 22 प्रकार के जांच के लिए बाहर निजी लैबों में जाना पड़ रहा है, जिससे उन्हे चार से पांच सौ रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन 120 से 140 मरीजों की बॉयोकमेस्ट्री जांच लिखी जाती है। इनमें से चार या पांच प्रकार की जांच प्रत्येक मरीज को करवानी पड़ती है। ऐसे में प्रतिदिनि 130 मरीज भी कम से कम पांच प्रकार की जांच करवाते हैं तो उनकी जेब से 65 हजार रुपए प्रतिदिन जा रहे हैं।
एसी खराब होने से जला उपकरण
जानकारी के मुताबिक पौथोलॉजी के जांच कछ में करीब 15 दिन से एसी खराब है। लेकिन अस्पताल प्रशासन एसी सही नहीं करवा सका। लैब के कर्मचारी खुद भी अनुबंधित एसी मरम्मत करने वाली फर्म के पास जाकर आ गए लेकिन अभी तक एसी सही नहीं हो सकी। इसके कारण फुल्ली ऑटो बायोकमेस्ट्री एनालाइजर का यूपीएस गर्म होकर जल गया। इसके बाद सेमी ऑटो अनालाइजर पर जांच शुरू की गई लेकिन वह भी लोड अधिक होने से बैठ गया। इसकी जांच रिपोर्ट भी सामान्य रूप से आ रही है। इसके कारण मरीजों को भी भारी परेशानी हो रही है।
ऐसे में मरीजों की आधी-अधूरी जांच हो रही है। हालांकि बताया जा रहा है कि गंभीर व भर्ती मरीजों के लिए सुगर व यूरिया की जांच की जा रही है। ज्ञातव्य हो कि २२ जुलाई को मशीन खराब हुई थी लेकिन अभी तक सही करने वाले इंजीनियर नहीं आए। कम्पनी के स्थानीय इंजीनियरों ने आकर देखा लेकिन वे ठीक नहीं कर सके।
यह जांचें नहीं हो रही
सुगर एफ, सुगर पीपी, बी यूरिया, एस क्रेटनिन, यूरिया एसिड, एस-बिलरुबिन (टी,डी,आईडी), एसजीओटी, एसजीपीटी, एस-अल्क फास्फोरेट, एस-टोटल प्रोटीन, एस-अल्बुमिन, एस-कैल्सियम, एस-सीके नैक, एस-सीके एमबी, एस-एलडीएच, एस-एमीलेस, एस-कोलेस्ट्रोल, एस-एचडीएल, एस-वीएलडीएल की जांच चार दिन से बंद है। यदि किसी मरीज को उक्त सभी जांच करवानी पड़े तो बाहर करीब १६०० रुपए लग जाएंगे। जबकि अंदर कराने पर निशुल्क हो जाती है।
''मशीन के खराब होते ही राजस्थान मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन के संबंधित विभाग को सूचित कर दिया गया है। इसका काम केटीपीएल कम्पनी को दिया गया है। रिमांडर भी भेज दिया गया है। दो या तीन दिन में मशीन को सही करवा दिया जाएगा। कम्पनी ने यदि किसी प्रकार की आनाकानी करती है तो उस पर पेनल्टी भी लगाई जाएगी।''
डा. जेएन खत्री, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज, चूरू





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