सीकर.
बेबस दिव्यांग दंपती जिनके दो वक्त की रोटी का ठिकाना और इलाज के लिए पैसे नहीं है और तो और ईश्वर ने उन्हें औलाद के सुख से भी वंचित कर रखा है अब प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है। भैरूपुरा के इस दिव्यांग दंपती ने आर्थिक मदद के बजाए स्वाविभमान से जीने के लिए सिलाई की मशीन मांगी है।
संतान की कमी और आर्थिक तंगी ने भैरूपुरा के दिव्यांग दंपती की खुशियों को ग्रहण लगा रखा है। दिव्यांग होने से पैर जवाब देने लगे हैं और इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। स्थिति यह बन चुकी है कि पेट के गुजारे के लिए दंपती ने प्रधानमंत्री से मदद की गुहार लगाई है। जिसमें उल्लेख किया है कि उनके इलाज की व्यवस्था और कहीं से एक सिलाई मशीन उपलब्ध करा दी जाए तो वे लोग बाकी की बची जिंदगी स्वाभिमान से गुजार सकते हैं।
भैरूपुरा निवासी हरलाल खुद एक पैर से दिव्यांग है तथा इसकी पत्नी मुनकेस भी दिव्यांगता के कारण चलने में सक्षम नहीं है। गांव के लोगों का कहना है कि पहले पिता और इसके बाद मां की मौत हो जाने पर दोनों बेबस और अनाथ हो चुके हैं। दिव्यांग होने के कारण हरलाल उनकी मौत के बाद कर्जे में डूब गया। रुपयों के अभाव में चाहते हुए भी दोनों अपना इलाज नहीं करा पा रहे हैं। चल नहीं सकने के कारण खतरा बना हुआ है कि जर्जर मकान के नीचे ये कभी भी बड़े हादसे का शिकार हो सकते हैं।
हरलाल के परिवार की आर्थिक स्थिति देखकर कई बार ग्रामीण अपने स्तर पर मदद कर चुके हैं। लेकिन, बदतर होती जिदंगी को संवारने के लिए अब इन्हें सरकारी मदद की दरकार है। ग्रामीण जगदीश प्रसाद सुंडा, रामनिवास, चुन्नीलाल व कन्हैयालाल के अनुसार हरलाल के एक छोटा भाई है। उसे भी प्रशासन खाद्य सुरक्षा में शामिल नहीं कर रहा है। आर्थिक तंगी में इलाज की सुविधा नहीं मिलने के कारण दोनों घुट-घुट के जीवन जीने को लाचार है।
पेंशन के भरोसे
हालांकि ग्रामीणों ने मिलकर दोनों की दिव्यांग पेंशन शुरू करवाई थी। लेकिन, इसमें आधी रकम तो कर्ज चुकाने में खप जाती है। बाकी राशि से महीनेभर का तेल-नमक खरीदना भी मुश्किल हो रहा है। प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दोनों ने सिलाई मशीन उपलब्ध कराकर देने की मांग रखी है। लेकिन, पीएमओ कार्यालय से अभी तक उसका कोई जवाब नहीं आया है।





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