नसीराबाद
ब्यावर मार्ग स्थित गोविन्दसिंह गुर्जर राजकीय महाविद्यालय में बीएड संकाय इन दिनों मात्र एक व्याख्याता के भरोसे चल रहा है। महाविद्यालय में संचालित बीएड का प्रारंभ गत कांग्रेस सरकार द्वारा राजस्थान में खोले गए 5 बीएड कॉलेजों में से गोविन्दसिंह गुर्जर राजकीय महाविद्यालय में शुरू किया गया। बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए 16 शिक्षकों की आवश्यकता है, लेकिन यहां मात्र एक व्याख्याता डॉ. अर्चना पुरोहित जो कि गृह विज्ञान विषय से संबद्ध हैं वही कार्यरत हैं।
विगत 30 जून को डॉ. गोपालसिंह शेखावत के सेवानिवृत्त होने के बाद यह बीएड संकाय एकमात्र व्याख्याता डॉ. अर्चना पुरोहित के भरोसे संचालित हो रहा है। ऐसे में चिंतनीय यह भी है कि अन्य विषय हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, राजनीतिक विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल, इतिहास, वार्णिज्य जैसे विषय गृह विज्ञान की व्याख्याता पुरोहित किस प्रकार से शिक्षण कराएंगी।
आश्चर्यजनक तथ्य यह भी है कि एक व्याख्याता के भरोसे संचालित बीएड पाठ्यक्रम को एमडीएस विश्वविद्यालय अजमेर ने संबद्धता योग्य कैसे मान लिया। ऐसे में जहां एक तरफ नियमों की अनदेखी की जा रही है, वहीं अध्ययनरत विद्यार्थी किस प्रकार तैयारी कर सकेंगे यह भी चिंतनीय है।
स्थापना दिवस समारोह भी
1 अगस्त को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस समारोह भी होगा। विश्वविद्यालय में वैदिक मंत्रोच्चार से हवन और पौधरोपण कार्यक्रम होगा। इसमें विद्यार्थी, शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी शामिल होंगे। विश्वविद्यालय में पौधरोपण कार्यक्रम होगा। फलदार और अन्य पौधे लगाए जाएंगे।
समारोह की तैयारियां शुरू
विश्वविद्यालय ने समारेाह की तैयारियां शुरू कर दी हैं। जल्द आमंत्रण पत्र छपवाकर राजभवन, मुख्यमंत्री कार्यालय, सचिवालय और अन्य विभागों में भेजे जाएंगे। टॉपर्स की अस्थाई सूची वेबसाइट पर अपलोड हो चुकी है। जल्द स्थाई सूची जारी होगी।
एमबीए से बनाने लगे दूरी
साल 2004-05 तक इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स और सामान्य युवाओं में एमबीए के लिए जबरदस्त रुझान था देश के नामचीन आईआईएम और निजी मैनेजमेंट संस्थानों, विश्वविद्यालयों और कॉलेज में एमबीए की सभी सीट भर जाती थी। पिछले 10-12 साल में स्थिति बदल चुकी है। अब एमबीए की डिग्री लेने में विद्यार्थियों और युवाओं की ज्यादा रुचि नहीं है। खासतौर पर बी.टेक डिग्री लेने वाले इंजीनियर्स भी अब मैनेजमेंट कोर्स को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं। वैश्विक मंदी, अच्छे पैकेज नहीं मिलने, कम्पनियों-संस्थानों को मनमाफिक दक्ष युवा नहीं मिलना भी इसकी प्रमुख वजह है।
टेक्निकल डिग्री लेना पंसद
अब इंजीनियरिंग कॉलेज में विद्यार्थियों की पहली पसंद तकनीकी डिग्री लेना हो गई है। वोकेशनल, स्किल और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों की शुरुआत के बाद पूरे देश में स्थिति तेजी से बदल रही है। युवा नौकरी के अलावा एन्टप्रन्योर (उद्यमिता) की तरफ कदम बढ़ाने लगे हैं। कई नौजवानों ने छोटे और बड़े स्टार्ट अप लगाने शुरू कर दिए हैं। इनमें ऑनलाइन कंसलटेंसी, कस्टमर केयर, रिटेल सर्विस, बैंकिंग और इंश्यारेंस सेक्टर से जुड़ी जॉब शामिल हैं।
एमबीए एडमिशन के ये हाल..
महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में पिछले दो सत्र से एमबीए में दाखिलों का ग्राफ शून्य है। बॉयज कॉलेज में 10 से 15 प्रवेश होते हैं। राजस्थान के सभी इंजीनियरिंग कॉलेज में संचालित एमबीए कोर्स में प्रवेश लगातार सिमट रहे हैं। बीते पांच साल से पूरी सीटें नहीं भर पा रही हैं। अजमेर के सावित्री कन्या महाविद्यालय, श्रमजीवी सहित कई कॉलेज को एमबीए कोर्स बंद करना पड़ाहै। हालांकि महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में एमबीए की सीट पर प्रवेश नहीं घटे हैं। इसी तरह निजी विश्वविद्यालय में भी सीट भर रही हैं।





No comments:
Post a Comment