Breaking News
recent

अब राजस्थान निभा सकता है जैविक दूध उत्पादन में अग्रणी भूमिका


बीकानेर. राजस्थान में पशुपालन और डेयरी तंत्र का बड़ा नेटवर्क है। इससे प्रदेश में जैविक दूध उत्पादन की अत्यधिक संभावनाएं हैं और इसके उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। लोगों में अब जैविक दूध की गुणवत्ता को लेकर जागृति बढ़ रही है। यह स्वाद एवं पोषण की दृष्टि से अच्छा माना जाता है। जैविक पशुधन उत्पादन प्रणाली के निर्धारित मानकों की कमी को राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय संस्थान में शोध एवं अनुसंधान से दूर किया जा सकता है।

वेटरनरी कॉलेज के वैज्ञानिक प्रो. बसंत बैंस ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से डेयरी क्षेत्र के विकास की घोषणाओं को जारी रखने के लिए जैविक दूध उत्पादन में महती भूमिका निभाई जा सकती है। जैविक दूध ए-२ श्रेणी का होता है, जो देसी नस्ल की गायें देती हैं। जैविक दूध और उत्पादों के लाभ के लिए उत्पादन वृध्दि समूह के माध्यम से जागरूकता लाने से उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकेगी। इासे जैविक दूध की मांग में भी बढ़ेगी। हालांकि जैविक दूध की वैश्विक स्तर पर मांग की तुलना में आपूर्ति नहीं है।

 

मांग ज्यादा
प्रो. बैंस ने बताया कि डेयरी उत्पादों का भारत में उत्पादन २०१२-१३ के अनुसार ८७८२४.२१ मिलियन टन है। जैविक दूध और दूध उत्पादों की मांग ज्यादा है। जैविक दूध का मूल्य सामान्य दूध से अधिक होने के कारण उच्च आय वर्ग एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की पहुंच में है। महानगरों में जैविक दूध के बाजार की संभावना अधिक है।

 

यह है जैविक दूध
प्रो. बैंस ने बताया कि यूरोपीय आयोग ने जैविक पशुधन उत्पादन प्रणाली के लिए मानक निर्धारित किए हैं। जानवरों के ओफल्स या अन्य योजक का उपयोग किए बिना, कृत्रिम उर्वरकों या कीटनाशकों का उपयोग किए बिना ८० प्रतिशत चारा जैविक मानकों के अनुसार उगाया जाना चाहिए। जैविक दूध कीटनाशक, रासायनिक सामग्री से मुक्त, योजकों और स्वास्थ्य जोखिम से मुक्त होना चाहिए। इसके लिए गायों को पूर्णतया जैविक चार दिया जाए, जिस पर किसी रसायन का छिड़काव नहीं हो। गाय के खाद्य में कोई रसायन व दवा नहीं हो। जैविक दूध एक स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद है और व्यक्ति को स्वस्थ रखता है।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.