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बेखौफ बोल रहे: ठेठ ऊपर तक जाता है लिफाफा, हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा!

अमरसिंह राव/त्रिलोक शर्मा
सिरोही. सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद शहर समेत जिले में बजरी खनन धड़ल्ले से हो रहा है। इससे जुड़े लोग इतने बेखौफ हैं कि अब रात के स्याह अंधेरे में नहीं, दिन के उजाले में भी आला-अफसरों के दफ्तरों के पास से आराम से निकल रहे हैं। निजी ही नहीं, सरकारी कार्यों में भी बजरी का सरेआम उपयोग हो रहा है। इनको रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है। लगता है, सबकुछ जानते-समझते हुए भी जिम्मेदार बड़ी कार्रवाई का साहस नहीं जुटा पा रहे। 'पत्रिका टीमÓ ने लगातार चार दिन तक बजरी खनन से जुड़े लोगों-दलालों पर नजर रखी और इनके फोटो कैमरे में कैद किए। दुस्साहस देखिए...बजरी खनन से जुड़े एक मजदूर ने खुद का नाम तो नहीं बताया लेकिन इतना जरूर कहा कि फोटो खींचने से हमारे कोई फर्क नहीं पड़ता, ठेठ ऊपर तक लिफाफा जाता है हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। बजरी खनन पर प्रभावी रोक के मामले में जिला कलक्टर बाबूलाल मीणा संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। वे बोले- कार्रवाई की जा रही है।
दिन के उजाले में दौड़ रहे टै्रक्टर
देश के सबसे बड़े कोर्ट के आदेशों को किस तरह दरकिनार किया जाता है। तस्वीरों में इनकी बानगी देखिए...क्योंकि तस्वीर कभी झूठ नहीं बोलती। निजी ही नहीं, यहां सरकारी कार्यों में ही बजरी का उपयोग हो रहा है। इन पर रोक नहीं लग रही। सबसे बड़ा सवाल-जिम्मेदार कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे? क्योंकि सरकारी कार्यों में बजरी का उपयोग हो रहा है? जब सरकारी कार्यों में ऐसा खेल होगा तो दूसरों पर किस तरह शिकंजा कसेंगे?
दृश्य-१: सिरोही एसपी बंगले के ठीक सामने सीमेंट की टाइल्स बिछाने का कार्य चल रहा है। यहां जमीन पर रेत बिछाने के बाद उस पर टाइल्स लगाई जा रही है।
दृश्य-२ जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल परिसर स्थित जनाना अस्पताल के पीछे बन रहे भवन में धड़ल्ले से बजरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
दृश्य-३ पंचायत समिति के निकट स्थित अधीक्षण अभियंता के दफ्तर के पास परकोटा बनाया जा रहा है। जहां ट्रैक्टरों के माध्यम से बजरी लाई जा रही है।
&हम निरन्तर कार्रवाई कर रहे हैं। यदि सरकारी कार्यों में भी बजरी का उपयोग हो रहा है तो हम इसकी सूची तैयार करवा रहे हैं। हम निश्चित तौर पर कार्रवाई करेंगे।
मूलसिंह देवड़ा, खनि अभियंता, सिरोही



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