भण्डाना. सदर थाना इलाकेके राजकीय सीनियर उच्च माध्यमिक विद्यायल भण्डाना में रात चोर कम्प्यूटर, मॉनिटर, सीपीयू, प्रिंटर व स्कैनर समेत हजारों रुपए का सामान चोरी कर ले गए। प्रधानाचार्य सुरेश स्वर्णकार ने बताया कि गुरुवार रात को चोर स्कूल की दीवार फांद कर अंदर घुसे तथा कम्प्यूटर कक्ष कार्यालय के ताले तोड़ कर उसमें रखा कम्यूटर व उसका सामान चुरा ले गए। यहां तक कि कार्यालय में रखे दानपात्र को भी नहीं बक्शा, दानपात्र का ताला तोड़कर स्कूल बाउंड्री से बाहर फैंक गए। हालांकि दानपात्र तीन दिन पहले ही राशि निकाल ली थी।
रात को कर्मचारी के सोते हुए हुई घटना
चोरी कि घटना लगभग रात्रि एक बजे बाद की बताई का रही है। सहायक कर्मचारी मंगलराम मीणा ने बताया कि रात एक बजे स्कूल को संभाल कर बाहर चबूतरे पर सो गया था। चोरों ने ताले काट कर वारदात को अंजाम दिया। उस पध्े वक्त बिजली गुल थी। सुबह जाग होने पर देखा तो पांच ताले टूटे मिले। प्रधानाध्यापक ने सदरथाने में भी रिपोर्ट दे दी है।
सहायक कर्मचारी को नोटिस
प्रधानाचार्य ने कार्य के प्रति गंभीर लापरवाही के लिए सहायक कर्मचारी मंगलराम को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि ड्यूटी पर रहते चोरी कैसे हुई।
पैंथर ने फिर किया बछड़ी का शिकार
कुण्डल. ग्राम पंचायत कालोता के खड़का गांव में पैंथर ने एक बार फिर बछडी का शिकार किया। पैंथर के इस तरह खुलेआम विचरण करने से ग्रामीण दहशत में हैं। सूचना पर मौके पर पहुंचे वनपाल नाका कुण्डल के दीपसिंह राजावत और जितेन्द्र कुमार शर्मा ने पगमार्क लेकर पैंथर होने की पुष्टि की। ग्रामीणों ने बताया कि खड़का निवासी राकेश कुमार मीना के बाडे में बंधे पशुओं में से गाय की बछड़ी को पास ही निर्मित पक्के नाले में ले जाकर बछड़ी का शिकार कर लिया।
घटना शुक्रवार तड़के 2 बजे बाद की बताई जा रही है। मौके पर पहुंचे वनपाल नाका कुण्डल के कर्मचारीयों ने अनुसार पगमार्क के आधार पर पैंथर के साथ शावक होने का अंदेशा जताया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में पिछले छह वर्ष से अधिक समय से कुण्डल, खड़का, सिण्डोली, बड़ोली, खोर्रा-खुर्द, चौबड़ीवाला, दुडकी, भांवता-भांवती सहित आस-पास के पहाड़ी क्षेत्र में बघेरा खुलेआम विचरण कर रहा है, लेकिन वन विभाग के अधिकारी केवल पगमार्क लेने की कारवाई तक ही सीमित है। विभाग द्वारा बघेरे को पकडऩे की आज तक कोई कारवाई नहीं हुई। इस कारण ग्रामीण दहशत में जीने को मजबूर है। ग्रामीणों ने बघेरे को पकडने की मांग की है। बघेरे को नहीं पकडऩे पर ग्रामीणों को मजबूरी में आन्दोलन करना पड़ेगा।





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