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जिले में बढ़ रहे ऐसे अपराधी, हाईटेक होगा पुलिस तंत्र, जानिए पूरी खबर

जैसलमेर. साइबर दुनिया में स्वाभाविक रूप से बढ़ रहे साइबर अपराधों से निपटने के लिए जैसलमेर पुलिस ने अधिक से अधिक ‘नफरी’ को इस काम में प्रशिक्षित करने का फैसला किया है। इसके तहत साइबर अपराध घटित होने पर थाना स्तर पर पहले के मुकाबले ज्यादा पुलिसकर्मियों को कम्प्यूटर के जरिए रोकथाम का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले जहां साइबर अपराध होने की सूरत में कार्रवाई के लिए केवल पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लगे कम्प्यूटर में सॉफ्टवेयर की व्यवस्था को वृत अधिकारी कार्यालय और जिले के बड़े थानों तक फैलाया जा रहा है। इसके साथ ही पुलिस तंत्र में कम्प्यूटरों की संख्या बढ़ाने और अधिकाधिक कार्मिकों को उस पर कार्य करने का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है।

रोजाना एक शिकायत
कम्प्यूटर और मोबाइल से चीजों की खरीदारी के बढ़ते चलन से ऑनलाइन ठगी के सीमावर्ती जिले में आए दिन प्रकरण सामने आ रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार जिले भर में औसतन एक मामला पुलिस की चौखट पर पहुंचता है, जिसमें ऑनलाइन शॉपिंग की साइट्स अथवा ई-पेमेंट करने के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने पर संबंधित लोगों को आर्थिक चपत लगाई जाती है। ऐसे साइबर अपराध करने वाले देश के किसी भी हिस्से में मौजूद होते हैं। बीते समय में जिलावासी ऐसे तत्वों के हाथों अपनी मेहनत के लाखों रुपए लुटा चुके हैं।

समय रहते करें शिकायत
गौरतलब है कि यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का षिकार होते ही उसकी शिकायत पुलिस में करे तो कई मामलों में पुलिस हाथोहाथ कार्रवाई करते हुए उसके खाते से लैस हुए रुपयों को वापस दिला देती है। जानकारी के अनुसार कोई भी शापिंग अथवा ई-पेमेंट करवाने वाली साइट पर किसी व्यक्ति के खाते से लैस हुई राशि के हस्तांतरण में दो से तीन दिन का समय लगता है। ऐसे में अगर किसी के साथ ठगी हो और वह तुरंत पुलिस के पास पहुंच जाए तो पुलिस संबंधित साइट संचालक को पत्र लिखकर भुगतान स्थगित करने के लिए कहती है।संबंधित साइटसंचालक डील को निरस्त कर संबंधित व्यक्ति के खाते में राषि लौटाने की कार्रवाई करती है।

‘मोबाइल बम’से सजग रहें
मोबाइल के जरिए वित्तीय अपराधों के मुकाबले कहीं अधिक खतरनाक सोशल साइट्स के जरिए फैलाई जाने वाली जहरीली पोस्ट्स साबित हो रही हैं। पुलिस भी मानती है कि फेसबुक और वॉट्सएप के जरिए फैलाई जाने वाली नफरती भरी सामग्री के प्रचार-प्रसार से हिंसा फैलती है और सामाजिक ताने-बाने पर विपरीत असर पड़ता है।यह एक तरह से मोबाइल बम का काम करती हैं।इनसे निपटने के लिए जिले के माध्यमिक स्तर के स्कूलों व कॉलेजों में पढऩे वाले विद्यार्थियों को खास तौर पर जागृत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।पिछले अर्से के दौरान जिले के विभिन्न थानों में इस संबंध में न केवल मामले दर्ज हुए हैं बल्कि आईटी एक्ट के तहत संबंधित व्यक्तियों की गिरफ्तारियां भी हुई है।वैसे पुलिस के हाथ सोषल साइट पर जहरीली पोस्ट को प्रारंभिक रूप से बनाने व प्रचारित करने वालों तक नहीं पहुंच पाते क्योंकि इनके सर्वर देश से बाहर है।

फैक्ट फाइल -
-08 लाख करीब है जिले की जनसंख्या
-18 पुलिस थाने जैसलमेर में
-03 वृत कार्यालय जिले में कार्यरत

आमजन सावधान रहे
साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस अपनी ओर से पूरा प्रयास कर रही है।फिर भी इससे बचने के संबंध में जन-जागृति सबसे प्रबल हथियार है। पुलिस इस दिशा में लगातार प्रयास करती है।
-गौरव यादव, जिला पुलिस अधीक्षक , जैसलमेर



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