चित्तौड़ डिपो को दो माह में २४ लाख का नुकसान
चित्तौडग़ढ़. रोडवेज बसों के संचालन में घाटा बढ़ता जा रहा है। केवल अप्रेल व मई माह में ही करीब २४ लाख रुपए का घाटा रोडवेज के चित्तौड़ डिपो को हो चुका है। इसके पीछे रोडवेज प्रबंधन व कर्मचारी भले निजी वाहनों के अवैध संचालन को कारण बताए लेकिन सबसे बड़ा कारण प्रतिस्पर्धी रेल व निजी ट्रेवल्स की तुलना में महंग यात्रा होना हो गया है। किराया बढ़ाते रहने के बावजूद रोडवेज का घाटा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इससे कर्मचारियों को समय पर वेतन-भत्तों का भुगतान भी कठिन होता जा रहा है। रेलवे में रोडवेज की तुलना में बहुत कम किराया होने से जहां रेलवे स्टेशन की सुविधा है वहां सफर के लिए मुसाफिरों की पहली पसंद रेल बन गई है। निजी बसों व जीप आदि का किराया भी रोडवेज बसों की तुलना में बहुत कम होने से कई यात्री उनको प्राथमिकता देने लगे है।
आकड़ो की माने तो इसी वर्ष के मार्च माह में चित्तौडग़ढ़ डिपो के रोडवेज से कमाई तो ४०४.९४ लाख रूपए का हुआ पर इसके बदले में ४१३.९२ रूपए का खर्चा हुआ, इस हिसाब से लगभग ८.९८ लाख रूपए का घाटा झेलना पड़ा। वहीं अप्रेल माह में कमाई ३९८.१० लाख रूपए हुआ तो खर्चा ४०९.०१ लाख रूपए हुआ। इसके कारण १०.९१ लाख रूपए का घाटा हुआ। माह मई में भी ४११.३२ लाख रूपए की कमाई और ४४४.४२ लाख रूपए का खर्चे होने से १२.८५ लाख रूपए का नुकसान हुआ है।
किराया बढ़े तो यात्री घटे
रोडवेज की बसों को निजी वाहनों की प्रतिस्पर्धा के कारण पर्याप्त यात्री भार नहीं मिल रहा है। किराया बढ़ाने के कारण यात्रियो ने रोडवेज से दूरी बना ली है। सरकार ने रोडवेज को नई बसें उपलब्ध कराने की बजाए निजी वाहनो को ही बढ़ावा देकर नए लाईसेंस जारी किए है। लोक परिवहन की बसो को भी बढ़ावा दिया गया है। वहीं टेम्पो भी अब ५० किलोमीटर तक सवारियां लेकर जाने लगें। रोडवेज की ११२ बसे लगभग ३९८६८ किलोमीटर चलती है, जिसमें से दु्रतगामी की बसे २३४८६ किलोमीटर चलती है।
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बिना टिकट दिए करा देते यात्रा
रोडवेज बसों में परिचालकों द्वारा बिना टिकट सफर करा मुसाफिर से टिकट के पैसे खुद रख भ्रष्टाचार करने के आरोप लगते रहे है। इसे रोकने के लिए रोडवेज प्रबंधन ने उडऩदस्तों का गठन कर रखा है। इसके बावजूद अब भी कई परिचालक कम दूरी के सफर को बिना टिकट काटे ही यात्री को करा देते है। मोबाइल के माध्यम से परिचालक को उस रूट पर उडऩदस्ते के घूमने की जानकारी मिलती है तो बिना टिकट वाले मुसाफिर को टिकट थमा दिया जाता है।
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अवैध वाहनो की गाडिय़ो की संख्या बढऩे से रोडवेज घाटे में जा रही है। यदि अवैध वाहनो पर रोक नहीं लगी तो यह घाटा बढ़ता जाएगा।
राकेश सारस्वत, मुख्य प्रबंधक, राजस्थान रोडवेज, चित्तौड़ डिपो





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