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देर रात तक निकालते रहे सूरसागर से पानी, मौके पर रहे न्यास अध्यक्ष

बीकानेर. सूरसागर से पानी निकालने का कार्य रविवार को देर रात तक जारी रहा। पानी निकलने के लिए रेंप बनाकर ट्रेक्टर को नीचे उतारा गया। इससे पानी निकालने का काम चल रहा है। रविवार को भारी मात्रा में पानी बाहर निकाला गया है। इसके लिए नौ पंप लगाए गए हैं।

 

पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। इस दौरान विकास न्यास अध्यक्ष महावीर रांका, पार्षद राजेन्द्र शर्मा आदि देर रात तक मौके पर ही जुटे रहे। सूरसागर की जीर्णोद्धार के लिए निविदाएं जारी हो चुकी हैं, जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। गौरतलब है कि 1.21 करोड़ रुपए से सूरसागर की काया पलट की जाएगी। नगर विकास न्यास इस कार्य में जुट गया है।

 

यह काम होंगे
सूरसागर की टूटी दीवार का निर्माण 68 लाख रुपए से, रेलिंग, चौकी और सीढिय़ों की मरम्मत 20 लाख रुपए से कराई जानी प्रस्तावित है। पिछले दिनों बीकानेर आईं मुख्यमंत्री ने कलक्टर और न्यास अध्यक्ष को 15 दिनों में सूरसागर को तैयार करने की हिदायत थी। इसके बाद से ही प्रशासन ने इस काम में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

 

 

अभिभावकों के सामने नई चुनौतियां
बीकानेर. बच्चों का अभिभावकों की आदतों के कारण स्वाभाविक विकास नहीं हो पाता, जिससे उनके व्यक्तित्व में कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं हो जाती हैं। बच्चे घर, आसपास से तथा खुद गलती करके सीखते हैं। अभिभावक गलतियां करने में उनको अनावश्यक संरक्षण देकर सीखने से रोकते हैं।

 

बच्चे का समग्र विकास वैसे ही होता है, जिस तरह एक पौध को विकसित होने के लिए अनुकूल वातावरण, मिट्टी, पानी, खाद की जरूरत होती है। यह बात तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के मंच से रविवार को आशीर्वाद भवन में आयोजित परवरिश कार्यक्रम में बाल मनोवैज्ञानिक माया बोहरा ने की। वे इस विषय पर देशभर में संवाद कर रही है।

 

बोहरा ने कहा कि बच्चों की परवरिश में अभिभावकों के सामने नई चुनौतियां आ रही हैं। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि वे रात ८ बजे बाद टीवी देखना बंद कर दें और बच्चों के साथ बैठें। वे बच्चों के शारीरिक, सामाजिक, बौद्धिक व भावनात्मक विकास की जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पा रहे हैं। अभिभावक को बच्चों के भावनात्मक विकास के लिए बच्चा बनकर भी व्यवहार करना होता है।

 

वैज्ञानिक आधार बताएं
मुख्य अतिथि प्रो. विमला डुकवाल ने कहा कि बच्चों की परवरिश की माता-पिता दोनों की जिम्मेदारी है। टीवी, सोशल मीडिया परिवार और बच्चों के बीच संवाद में बाधक है। बच्चों को अगर संस्कृति एवं संस्कार के बारे में वैज्ञानिक आधार पर बताएंगे तो उन्हें समझाना आसान होगा।

 

अध्यक्ष बच्छराज कोठारी ने कहा कि फोरम ने पहले ऑटिज्म पर कार्यक्रम करवाए। इससे बच्चों को मनोवैज्ञानिक सम्बल दिया गया। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि डॉ. पीसी तातेड़, मंजू आंचलिया, शान्ता भूरा रहे। जिला उद्योग केन्द्र के संयुक्त निदेशक राजेन्द्र सेठिया, विजय कोचर, सोहनलाल बैद, सुरेश शर्मा, डॉ. सुचित बोथरा, प्रमोद चोरडिया उपस्थित रहे।



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