अलवर. शहर को चार जोन में बांटने के बावजूद शहर की सफाई वहीं तक सीमित है, जहां से अधिकारियों का आना-जाना रहता है। बाकी पुराने शहर, कच्ची कॉलोनियों में कचरा हमेशा सड़ता रहता है। चार जोन करने से सफाई ठेके के नाम पर जनता का पैसा खूब बर्बाद हो रहा है। लेकिन लेकिन हालात नहीं बदले हैं। पुराने शहर व कच्ची बस्ती व कृषि कॉलोनियों में कचरा संग्रहण का इंतजाम नहीं है। कचरा पात्र तक भरे हैं। कहीं नालों में तो कहीं आसपास के खाली भूखण्डों में कचरा फेंका जाना जारी है। नाले ऊपर तक लबालब हैं। नालियां तो खत्म ही होती जा रही हंै व आधी जगहों से कचरे तले अटी पड़ी हैं।
कचरा पात्र भी बेकार
पिछले दो सालों में सीमेंट के कचरा पात्रों पर करीब पचास लाख रुपए खर्च कर दिया। जो किसी काम नहीं आ रहे हैं। रेलवे स्टेशन के सामने सहित कई जगहों से नए कचरा पात्रों को हटा दिया गया।
अधिकतर जगहों पर पात्र के बाहर कचरा पड़ा रहता है। करौली कुण्ड जैसी जगहों पर कचरा पात्र से कचरा निकाले महीनों हो गए, जिससे ऊपर तक भरने के बाद अब सड़क पर कचरा पड़ रहता है। गुरुनानक कॉलोनी में कचरा ऐसे सड़ता है कि वहां खड़ा नहीं रहा जाता। जबकि यह सब तो शहर के बीच का हिस्सा है। दूर की कृषि कॉलोनी व कच्ची बस्तियों तक कोई पहुंचता ही नहीं है। वहां अधिकारियों की निगाह भी नहीं जाती। जिसके कारण वहां की गंदगी से बीमारियां फैल रही हैं।
जनप्रतिनिधियों के आवास के आसपास सफाई :
शहर के सभापति, विधाायक, पार्षद व मंत्रियों के घर के आसपास जरूर सफाई दिख जाती है। बाकी जगहों पर नहीं। शहर के प्रमुख रोड पर भी सफाई होती है लेकिन संकरी व पुराने क्षेत्रों में नहीं हो पा रही है। स्थानीय बुध विहार कच्ची बस्ती के तो हालात ऐसे है लोगों को नालियां स्वयं ही साफ करनी पड़ रही है।





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