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प्राइवेट वाहनों पर पीयूसी की धौंस, सरकारी पर मेहरबानी, अनदेखी से फेंक रहे धुआं

जालोर. पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए राज्य सरकार की ओर से लागू की गई पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) की अनिवार्यता अब भी महज कागजों में ही सिमटी हुई है। परिवहन विभाग की ओर से निजी व टैक्सी परमिट गाडिय़ों के चालान तो काटे जा रहे हैं, लेकिन सरकारी फरमान जारी करने वाले अफसरों की गाडिय़ों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। कई सरकारी वाहन शहर में जहरीला धुआं छोड़ रहे हैं। रोडवेज की अधिकतर बसों के भी यही हाल हैं। इसके बावजूद परिवहन विभाग की ओर से एक भी सरकारी वाहन की पीयूसी जांचने की जहमत तक नहीं उठाई है। ऐसे में देखा जाए तो यह कार्रवाई सिर्फ और सिर्फ आम जनता और निजी वाहनों के लिए ही है। हालांकि सरकारी निर्देशों के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कुछ दिन तक सख्ती जरूर बरती जाती है, लेकिन इसमें भी निजी वाहनों या टैक्सी परमीट गाडिय़ों की जांच की जाती है। जबकि यह नियम खुद सरकारी अफसरों पर भी लागू होते हैं।
दिए थे रजिस्टे्रशन रद्द करने के निर्देश
जिला प्रशासन की ओर से करीब डेढ़ साल पहले वाहन मालिकों की ओर से वाहनों की पीयूसी जांच नहीं कराने पर परिवहन विभाग को वाहनों के रजिस्टे्रशन रद्द करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विभाग की ओर से इस मामले में एक भी वाहन का रजिस्टे्रशन रद्द नहीं किया गया। वहीं इसके बाद हाल ही में विभाग ने पीयूसी को लेकर दोबारा निर्देश जारी किए हैं। जबकि सरकारी वाहनों की तो जांच तक नहीं की जा रही है। ऐसे में विभाग की ओर से किसी तरह की सख्ती नहीं बरतने और प्रशासनिक अधिकारियों की लचर मॉनिटरिंग के चलते ये निर्देश कारगर साबित नहीं हो पाए हैं।
जांच में बरत रहे ढिलाई
धुआ उगल रहे वाहन सड़क पर दौड़ते आसानी से देखे जा सकते हैं। कई भारी वाहन व हल्के या दुपहिया व तिपहिया वाहन भी इसमें शामिल है। एक आकलन के मुताबिक कई वाहन चालकों ने अभी तक प्रदूषण सबंधी जांच नहीं करवाई है। ऐसे में वाहन धुआं उगल रहे हैं, जो जिले की आबोहवा को जहरीली बना रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों के सामने से भी अक्सर इस तरह के वाहन गुजर जाते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
अधिकतर भारी वाहन छोड़ रहे धुआं
शहर से गुजरने वाले छोटे-मोटे वाहनों के अलावा ट्रांसपोर्टेशन के लिए चलने वाला अधिकतर भारी वाहन जहरीला धुआं छोड़ते नजर आते हैं। हालांकि इनके लिए यातायात पुलिस की ओर से अलग से बाईपास की व्यवस्था की गई है, लेकिन पीयूसी का नियम इन पर भी लागू होता है।ग्रेनाइट ब्लॉक, स्लेब और अन्य सामान लादकर ले जाने वाले अधिकतर भारी वाहनों की पीयूसी है नहीं। इसके बावजूद इस बारे में कोई सख्ती नहीं बरती जा रही है।
खुद ही नियमों को धत्ता बता रहे
नियमानुसार पुराने वाहनों में हर छह माह में पीयूसी करवाना होता है, लेकिन यहां सरकारी वाहन ही नियमों को धत्ता बता रहे हैं। अधिकारी मानते हैं कि कुछमाह पहले सरकारी वाहनों में अनिवार्य रूप से पीयूसी करवाया था, लेकिन इसके बाद नहीं करवाया। समयावधि के बाद इनका पीयूसी करवाना तो दूर किसी के खिलाफ कार्रवाई तक नहीं हुई।
नोटिस देकर कर रहे खानापूर्ति
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनकी ओर से वाहनों की पीयूसी को लेकर सख्ती बरती जा रही है। अगर कोई वाहनचालक बिना पीयूसी पाया जाता है तो उसे सात दिन में सर्टिफिकेट पेश करने को कहा जाता है। अन्यथा सम्बंधित वाहनचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। मगर इस मामले में अभी तक एक भी वाहनचालक का पंजीयन निरस्त नहीं किया गया है।
इनका कहना है...
उडऩदस्तों को इस सम्बंध में निर्देश दे रखे हैं।पीयूसी को लेकर भी हर बार कार्रवाई करते हैं।कुछ माह पहलेहमने सभी सरकारी वाहनों के अनिवार्य रूप से पीयूसी करवाए थे।इस तरह की कार्रवाई वापस करवाई जाएगी।
-प्रेमराज खन्ना, डीटीओ, जालोर



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