सीकर.
आषाढ पूर्णिमा पर 27 जुलाई को खग्रास चंद्रग्रहण होगा। यह भारत के अलावा दक्षिण अमरीका, अफ्रीका, पश्चिम एशिया, यूरोप के अलावा आस्ट्रेलिया में भी दिखाई देगा। आषाढ़ पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा भी कहते हैं। ग्रहण का अलग-अलग राशियों वाले जातकों पर अलग-अलग असर रहेगा। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष जुलाई माह की 27 तारीख को चंद्र ग्रहण होगा। ग्रहण काल में सूतक लगता है। इस समय पानी से लेकर भोजन का उपयोग वर्जित है। हालाकि शास्त्रों में इस बात का साफ उल्लेख है कि ये नियम यात्रा पर चल रहे व्यक्ति के साथ-साथ बीमार पर लागू नहीं होता है। इस ग्रहण का सूतक 27 जुलाई को दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से शुरू हो जाएगा। पंडित मिश्रा ने बताया कि ग्रहण के समय मकर राशि के केतु के साथ चंद्रमा का प्रभाव व राहु से इसका सातवां अंतर रहेगा। ऐसे में ये ज्योतिष में बेहतर या श्रेष्ठ नहीं माना जा सकता है। इस योग से देश के अनेक हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। -पंडित मिश्रा ने बताया कि ग्रहण के समय पृथ्वी की छाया के मध्य से चंद्रमा के सीधे गुजरने के कारण ही ये चंद्रग्रहण इतना लंबा रहेगा। 15 जून 2011 के बाद ये पहला अवसर होगा जब केंद्रीय चंद्र ग्रहण होगा। इसके पूर्व जनवरी माह में 31 जनवरी को माघ शुक्ला पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण हुआ था। उसके बाद ये इस वर्ष का दूसरा पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। अब इस वर्ष कोई चंद्र ग्रहण नहीं होगा।
चंद्र ग्रहण का समय
ग्रहण प्रारंभ
( रात्रि 11 बजकर 54 मिनट)
खग्रास प्रारंभ,
( देर रात्रि 1 बजे )
ग्रहण मध्य
( देर रात्रि 1 बजकर 52 मिनट)
खग्रास समाप्त
( देर रात्रि 2 बजकर 44 मिनट)
ग्रहण समाप्त
( अद्र्ध रात्रि बाद 3 बजकर 49 मिनट)
पर्व काल
( 3 घंटे 55 मिनट)
राशियों पर प्रभाव
मेष— सुख,वैभव।
वृष —मान हानि,भय।
मिथुन —दुर्घटना, भय।
कर्क— स्त्री, पति कष्ट।।
सिंह - कार्य सिद्धि ।
कन्या- चिंता पीड़ा।
तुला - रोग भय।
वृश्चिक-धनलाभ।
धनु— व्यय वृद्धि।
मकर—-शरीर कष्ट।
कुंभ—धन हानि।
मीन—उन्नति व लाभ।





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