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हर पांच कदम पर गड्ढे और गायें, बचना है तो हेलमेट लगाएं, अब सांडों की लड़ाई से चपेट में आ रहे आमजन

भीलवाड़ा।
आप मार्केट जाएं तो अब हेलमेट जरूर लगाएं। इसकी जरूरत केवल अब इसलिए नहीं है कि वाहन दुर्घटना हुई तो बच जाएंगे। अब आपको यदि घर सुरक्षित पहुंचना है तो खुद को सजग रहना ही पड़ेगा। एेसा इसलिए क्योंकि जिम्मेदारों की आंखें बंद है। अब शहर में जाएंगे तो हर पांच कदम पर गड्ढ़े और घूमती गायें मिलेगी। बचने की कितनी ही कोशिश करें तो भी दस में से एक व्यक्ति को तो हादसा झेलना ही पड़ेगा।

 

शहर में सांडों का आतंक है। हर चौराहे पर गायों और सांडों के झुंड मिल जाएंगे। इनसे बचने की कोशिश करेंगे तो गड्ढ़ेे में गिरने का खतरा रहता है। शुक्रवार को एक सांड बीच में आया तो एक युवक की दुर्घटना में मौत चली गई। एेसे हर रोज कई हादसे हो रहे हैं लेकिन कोई गंभीर नहीं है।

 

गायों का नहीं निकला समाधानशहर में लावारिश पशुओं को नगर परिषद कायन हाउस में ले जाती है। वहां से गायों को बाबा बालकनाथ ले गए लेकिन फिर गायों की संख्या बढ़ गई। अब नगर परिषद ने भी आवारा गायों को पकडऩा बंद कर दिया है। इससे शहर की सड़कों पर गायों का ही राज है।



दूध दुहने के बाद छोड़ देते हैं गायें
शहर में खाली पड़े भूखंडों पर कई लोगों ने गायें पाल रखी है। ये लोग सुबह-शाम दूध दुहने के बाद गायों को शहर में विचरण के लिए छोड़ देते हैं। कई लोग खाली भूखंडों पर ही चारा बेचते हैं। इससे सड़कों पर ही गायों का जमावड़ा रहता है। कुछ जगह तो एेसी है जहां चारा बेचने वालों ने ही गायें पाल रखी है। वे लोग सड़कों पर ही गायों को रखते हैं। इससे आए दिन हादसे हो रहे हैं।


गड्ढ़ों की मरम्मत नहीं
शहर की सड़कों पर बरसात के मौसम में गड्ढ़े हो गए है। इन गड्ढ़ों को भरने में किसी का ध्यान नहीं है। ये भी हादसे का कारण बन रहे हैं। बरसात का पानी भरने से गड्ढे एकाएक नजर भी नहीं आते हैं। उसमें गिरने से वाहनचालक चोटिल हो रहे हैं।

 

शहर में लावारिश छोड़े गए पशुओं को पकडऩा शुरू कर दिया है। कायन हाउस में अभी 350 गायें है। इसके लिए अभियान शुरू किया है।
पद्मसिंह नरूका, आयुक्त नगर परिषद



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