विमल छंगाणी/बीकानेर. मध्यकालीन भारत के इतिहास में मराठा नायक छत्रपति शिवाजी और महाराणा प्रताप की वीरता, शौर्य और मातृभूमि से प्रेम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। इन्हीं वीर नायकों से जुडे़ मूल दस्तावेज पहली बार आमजन देख सकेंगे।
बीकानेर में बन रहे देश के पहले अभिलेख म्यूजियम में महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी से जुडे़ मूल एेतिहासिक दस्तावेजों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इसके लिए अभिलेख म्यूजियम में दो दीवारें बनाई जा रही हैं। बीकानेर के राजस्थान राज्य अभिलेखागार में दोनों वीर नायकों के दुर्लभ दस्तावेज मूल स्वरूप में मौजूद हैं। इन्हें आज तक न तो आमजन और ना ही देश-विदेश के शोधार्थियों ने देखा है। अभिलेख म्यूजियम में प्रदर्शित होने के बाद इन दस्तावेजों को आमजन और शोधार्थी देख और पढ़ सकेंगे।
इनका होगा प्रदर्शन
राज्य अभिलेखागार निदेशक खडग़ावत के अनुसार प्रताप और शिवाजी के शासनकाल की वकील रिपोट्र्स, बहियां, ताम्रपत्र,
राजशाही आदेश, चित्र, किले व नक्शे आदि म्यूजियम में बन रही दीवारों पर प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके अलावा शिवाजी और औरंगजेब के बीच हुई पुरन्दर संधि का २२ फीट लम्बा दस्तावेज, महाराणा प्रताप से संबंधित कुछ अप्रकाशित दर्जनों दुर्लभ दस्तावेज भी प्रदर्शित होंगे।
देश का पहला अभिलेख म्युजियम
बीकानेर अभिलेखागार में देश का पहला अभिलेख म्यूजियम १० करोड़ ८० लाख रुपए की लागत से तैयार हो रहा है। इसमें करीब एक हजार दुर्लभ एेतिहासिक मूल दस्तावेजों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें चार गैलेरी भी तैयार की गई हैं। इनमें रियासतकालीन फरमान, ताम्र पत्र, स्वतंत्रता सेनानी दीर्घा और मानचित्र गैलेरी शामिल है।
अभिलेख म्यूजियम में मुगलकालीन एेतिहासिक फरमान, निशान, मंसूर, राजपूताना रियासतों की एेतिहासिक बहियां, पट्टे, परवाने, तोजी, दस्तूर कोमवार, ताम्रपत्र, अखबारात आदि दस्तावेज प्रदर्शित किए जाएंगे। इस म्यूजियम का अधिकतर कार्य सितम्बर तक पूरा होने का अनुमान है।
दुर्लभ दस्तावेज
बीकानेर अभिलेखागार में महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी से संबंधित मूल दुर्लभ दस्तावेज सुरक्षित हैं। इनको पहली बार प्रदर्शित किया जाएगा। दस्तावेजों को प्रदर्शित करने के लिए दो दीवार बनाई जा रही हैं।
डॉ. महेन्द्र खडग़ावत, निदेशक, राजस्थान राज्य अभिलेखागार बीकानेर





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