चूरू.
अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों को मीठा शीतल जल भी नहीं मिल रहा। मजबूूरी में उन्हे या तो खारा पानी पीना पड़ रहा है या बाहर से खरीदना पड़ रहा है। लोगों की इसी परेशानी को देख एक मरीज खुद अस्पताल में छह माह से प्याऊ लगाने के लिए चक्कर लगा रहा है लेकिन अस्पताल प्रशासन उसे स्वीकृति नहीं दे रहा, जबकि कलक्टर व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ स्वीकृति दे चुके हैं।
इसलिए लगा रहा प्याऊ
गांव खंडवा निवासी हुक्माराम पूनिया ने बताया कि वह करीब छह माह पहले अस्पताल में दवा लेने आया था। उस दौरान वह पानी पीने गया तो उसे खारा पानी मिला। उसी दिन से उसने अस्पताल में प्याऊ लगवाने के लिए सोच लिया। एक जनवरी २०१८ को अस्पताल प्रशासन के पास आरओ युक्त शीतल प्याऊ लगाने के लिए आवेदन भी कर दिया। अस्पताल प्रशासन कलक्टर व मंत्री की भी नहीं सुन रहा: अस्पताल प्रशासन बात टालता रहा तो पूनिया जिला कलक्टर के पास चले गए। कलक्टर ने अस्पताल में प्याऊ लगाने के लिए स्वीकृति जारी कर दी। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने स्वीकृति नहीं दी और बात को घुमाते रहे। इसके बाद वह दो बार मंत्री राजेन्द्र राठौड़ के पास गया। मंत्री ने अस्पताल प्रशासन को प्याऊ लगाने के लिए कहा तो अस्पताल प्रशासन ने कहा कि स्वीकृति दे दी गई है लगवा दिया जाएगा। लेकिन तीन महीने बीत गए अनुमति नहीं दी गई। बुधवार को अस्पताल प्रशासन की ओर से बताया गया कि नेत्र यूनिट परिसर में लगवा दीजिए। वहीं, अस्पताल के कार्यवाहक अधीक्षक डा. एफएच गौरी का कहना है कि अस्पताल प्रशासन प्याऊ लगवाना चाहता है। लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग से एक पत्र आया है कि प्रिंसिपल के बिना अनुमति के अस्पताल परिसर में कोई नया निर्माण कार्य नहीं किया जाए चू्ंकि अस्पताल में कॉलेज के मुताबिक विस्तार का कार्य चल रहा है। फिर भी लगवाने का प्रयास किया जा रहा है। अब प्रशासन इसका हवाला देकर प्याऊ लगाने में आनाकानी कर रहा।
भरतिया के अलावा दूसरी जगह नहीं लगाएंगे प्याऊ
सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार हुक्माराम ने बताया कि वह मरीजों व जनता के हित के लिए भरतिया अस्पताल परिसर में प्याऊ लगाना चाहता है न कि किसी मजबूरीवस। अब अस्पताल प्रशासन कह रहा है कि नेत्र चिकित्सालय में लगवा दीजिए। पूनिया ने कहा कि नेत्र चिकित्सालय में दो से तीन सौ मरीज आते हैं, मरीज भर्ती भी नहीं होते जबकि भरतिया में १२ सौ व १३ मरीज प्रतिदिन आते हैं। तीन से चार सौ मरीज प्रतिदिन भर्ती रहते हैं। यहां अधिक जरूरत है। लेकिन अस्पताल प्रशासन पता नहीं क्यों टाल मटोल कर रहा है। पूूनिया १९९१ में सेना से रिटायर्ड हुए थे अब वह गांव में गोशाला चलाते हैं और खेती करते हैं। पेंशन के बचे रुपए से प्याऊ लगाना चाहता है।





No comments:
Post a Comment