Breaking News
recent

खाप पंचायतों का खौफ, अपने बनाए कानूनों से जिन्दगी को बना रहे जहन्नूम, कईजातियों में सदियों पुराने नियम, भारतीय संविधान को दे रहे चुनौती

राजसमंद. सोशल मीडिया में आए दिन वायरल होती तस्वीरें बयां करती है कि खाप पंचायतों का खौफ अब भी बरकरार है। राजसमंद जिले में भी इन गैरकानूनी अदालतों का डंका बज रहा है। भारतीय कानून का खुलेआम मखौल उड़ाया जा रहा है। पिछले कुछ सालों में और इन दिनों भी ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जो साबित करते हैं कि गांव में रहना है तो पंचों का फैसला मानना ही होगा। आइए कुछ उदाहरणों पर गौर करते हैं...

१.घर में मौत पर लगता है दण्ड
भीम क्षेत्र के कालागुमान पंचायत के मंकियावास निवासी मनोहरलाल के पिता भैराराम की मौत हो गई। आरोप है कि मौत छह गांव के पंच लोगों ने दंड स्वरूप २५०० रुपए मांगे। पैसे मांगने का कारण पूछा तो उन्होंने नहीं बताया। जब मना किया तो पिता की अर्थी उठाने से मना कर दिया। उसे मजबूरन पंचों को पैसे देने पड़े। पंचों द्वारा लिए दंड के खिलाफउसने कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की, तो समाज से निष्कासित कर दिया। अब उसके घर न समाज के लोग आते हैं, न ही उसे समाज में बुलाया जाता है। यह परिवार समाज से अलग-थलग पड़ चुका है।

भारतीय कानून :
२.अन्तरजातीय विवाह इनके लिए हैगैरकानूनी
ओमप्रकाश पुत्र बद्रीलाल ने करीब १५ साल पूर्व अन्य समाज की एक लडक़ी से ब्याह रचाया। उसे और परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। आखिर उसका, मां-बाप समेत परिवार का क्या कसूर था? समाज ने पूरे परिवार को जाति से बाहर कर दिया। उनसे समाज और भाइयों ने भी सारे रिश्ते-नाते तोड़ लिए। परिवार पूरा किसी एक के यह कदम उठाने से समाज की बंदिशों की सजा भुगत रहा है। हालांकि कुछ समय बाद परिवार ने अन्तरजातीय विवाह के बाद बेटे और बहू को स्वीकार लिया, लेकिन समाज ने अभी भी कोई नाता वापस नहीं जोड़ा है। इसका खमियाजा यह गरीब परिवार भुगत रहा है।

३.समाज में विवाह करके क्या गलती की?
रामलाल पुत्र भैरूलाल के घर में चार भाई हैं। काफी समय बीत गया, लेकिन कहीं पर उसकी शादी नहीं हो पा रही थी। पांच साल पूर्व सबसे बड़े लडक़े ने अपनी ही जाति की लडक़ी से कोर्ट में शादी कर ली। जब समाज को पता चला तो पूरे परिवार को समाज से निकाला दे दिया। परिवार का सवाल है कि जब लडक़ों की शादी नहीं हो पा रही थी, तब समाज ने कोई मदद क्यों नहीं की? समाज से बहिष्कृत होने के बाद दो अन्य लडक़ों को कुंवारा रहना पड़ रहा है। इस परिवार के किसी भी कार्यक्रम में गांव और इस जाति के लोग नहीं आते हैं।

४.सिर्फ शक के आधार पर कबायली सजा
खाप पंचायत ने आठ नवम्बर-२०१४ को चारभुजा तहसील की थुरावड़ ग्राम पंचायत के थाली का तालाब गांव में एक महिला को अपने देवर की हत्या के शक के आधार पर निर्वस्त्र कर गधे पर बैठा पूरे गांव में घुमाया। देवर की लाश बिना पोस्टर्माटम के जला दी गई थी। महिला पर अत्याचार के मामले में पुलिस ने ७४ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आज भी यह मामला अदालत में विचाराधीन है। यह काण्ड संयुक्त राष्ट्र संघ तक गूंजा था।

५. पुनर्विवाह इनके लिए मर्यादा का प्रश्न?
राजसमंद के कुंवारिया क्षेत्र की पुष्पा का बाल-विवाह मावली के वल्लभनगर में हुआ था। पति की १५ साल पूर्व मौत हो गई। मौत के वक्त वह मात्र १२ वर्ष की थी। समाज में पुनर्विवाह नहीं होने से पूरी जिंदगी विधवा रहकर काटनी पड़ रही है। मर्यादा के नाम पर एक महिला की बाकी जिन्दगी पर बेडिय़ां लगा दी गईहैं।

6 . केसूली गांव में एक समाज के व्यक्ति की दो बेटियों ने कॉलेज से भागकर अपने-अपने प्रेमी से शादी कर ली। समाज के लोगों ने गरीब पिता पर दण्ड का बोझ लाद दिया। वह ब्याज पर पैसा लाकर समाज को चुकाने पर विवश है। जातीय पंचायत में जब उसे फैसला सुनाया गया, तो उसकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। एक बेटियों को खोने का दुख तो था ही, पंचायत ने दण्ड लगा उसकी कमर और तोड़ दी।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.