राजसमंद. किशोरियों के कुछ और परिजन शनिवार को राजसमंद पहुंचे। उन्होंने बाल कल्याण समिति कार्यालय के बाहर शाम को एकत्र होकर हंगामा किया और आरोप लगाया कि उनके पास पहचान के सभी दस्तावेज हैं, लेकिन समिति के अधिकारी उनकी जांच नहीं कर रहे हैं। परिजनों ने बच्चियों को वापस आश्रम भेजने की मांग की। संबंधित जिलों की बाल कल्याण समितियों के माध्यम से ही परिजनों को सौंपने का विरोध करते हुए पिछले चार दिनों से डेरा डाले परिजनों के सब्र का बांध शनिवार को टूटा। हंगामा करते हुए परिजनों ने समिति पदाधिकारियों पर आरोप लगाए कि उनके पास पूरे दस्तावेज होने के बावजूद समिति बच्चियों को नहीं सौंप रही हैं। शुक्रवार शाम बंगाल, महाराष्ट्र व नेपाल से आए परिजनों ने किशोरियों को बालिका गृह में रहने में समस्याएं बताईं। इधर, समिति ने परिजनों से बात करने से इनकार कर दिया।
सम्मान को पहुंची ठेस
परिजनों ने समिति की कार्रवाई को गलत ठहराते हुए सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान हमारी बेटियों को ले जाने से पहले हमें सूचित क्यों नहीं किया? कार्रवाई से हमारी बेटियों के सम्मान को ठेस पहुंची है।
बच्चियों से दुव्र्यवहार का आरोप
बंगाल, महाराष्ट्र, कोलकाता व नेपाल से आए परिजनों ने आरोप लगाया कि कल रात को बच्चियों के फोन आए, जिसमें उन्होंने बताया कि मेडिकल जांच करने आए लोगों ने उनसे दुव्र्यवहार किया। अपशब्दों का प्रयोग करने से वे आहत हुईं। भोजन, पर्याप्त शौचालय और बाथरूम न होने व अन्य अव्यवस्थाओं का भी आरोप लगाया।
पंजीकृत गृह में दिलाना था दाखिला
इन बच्चियों का रेस्क्यू कर अन्य जिलों के बालिका गृह में स्थानांतरित करने और वहां प्रवेश दिलवाने के आदेश सिरोही कलक्टर ने दिए थे। सिरोही के बाल अधिकारिता कार्यालय को यह पत्र मिलते ही आनन-फानन में आश्रम संचालक वहां गतिविधियां बंद कर गायब हो गए। बाल कल्याण समिति, राजसमंद का दावा है कि तब से ही आश्रम संचालक इन्हें लेकर यहां रह रहे हैं। राजसमंद की समिति को सिरोही में हुई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट मिलते ही शाम को थाने में मामला दर्ज करवाने की कार्रवाई शुरू हो गई।
भगौड़े आश्रम संचालक दीक्षित के विरुद्ध दिल्ली में दर्ज है बलात्कार का मामला
गौमुख आश्रम संचालक वीरेन्द्र देव दीक्षित के विरुद्ध दिल्ली के रोहिणी इलाके के विजय विहार थाने में १२ नवम्बर, २०१७ को बलात्कार का मामला दर्ज हुआ था। पीडि़ता ने रिपोर्ट में बताया कि वह शकूरपुर की रहने वाली है। दीक्षित ने उसे आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुडऩे के लिए प्रेरित किया। उसने बताया कि वहां अध्यात्म का ज्ञान दिया जाता है तथा परमपिता परमेश्वर की प्राप्ति होती है। विजय विहार स्थित आश्रम में आध्यात्मिक कक्षा ज्वॉइन कराने के बाद जून २००२ में उसे दीक्षित ने एकांत कमरे में बुलाकर बलात्कार किया। विरोध करने पर उसकी छोटी बहन के भी आश्रम में ही मौजूद होने और माता-पिता को जान से मरवा देने की धमकी दी। अपने ऊंचे रसूखात का हवाला देते हुए उसने कहा कि मुंह नहीं खोलने की हिदायत दी। उसके बाद कईबार उससे बलात्कार किया। रिपोर्ट में उसने बताया कि उसकी छोटी बहन भी उसके चंगुल में थी। आश्रम में कई लड़कियां थी, जिनका तंत्र विद्या और सम्मोहन के जरिये यौन शोषण किया जाता था। इधर, बाल कल्याण समिति को पता चला है कि दीक्षित को अदालत ने भगौड़ा घोषित कर रखा है। सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है। सीबीआई भी मामले की जांच कर रही है। इस संस्थान के पूरे देश में करीब २५० आश्रम संचालित हैं।





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