पाली. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का प्रसार-प्रचार कर पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को योजना का लाभ दिलवाने में पाली, जालोर व सिरोही जिले प्रदेश में पिछड़ रहे है। दूसरी ओर हनुमानगढ़, झुुंझुंनु व गंगानगर प्रथम तीन स्थानों पर बने हुए है। योजना की धीमी प्रगति को लेकर पाली, जालोर व सिरोही जिले मुख्यालय से योजना में प्रगति लाने के निर्देश मिल रहे है। महिलाएं अपने पहले जीवित बच्चे के जन्म से पहले ओर बाद में पर्याप्त विश्राम कर सकें तथा मजदूर तबके की महिलाओं को मजदूरी की क्षति के बदले में आंशिक क्षतिपूर्ति के रूप में प्रोत्साहन राशि देने की मंशा से देश भर में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना शुरू की गई। योजना के तहत महिला को गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक तीन किश्तों में पांच हजार रुपए प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जाते है।
पाली प्रदेश में 27वें स्थान पर
योजना के तहत पाली जिले में अभी तक 8260 महिलाओं का पंजीयन किया कर उन्हें योजना के तहत एक करोड़ तीन लाख 65 हजार रुपए वितरित कर योजना के तहत लाभान्वित करवाया गया। लेकिन प्रदेश स्तर पर यह आंकड़ा काफी कम है। स्थिति यह है कि इन आंकड़ों के तहत पाली जिला प्रदेश में 27वें स्थान पर है। पड़ोसी जिले जालोर व सिरोही की स्थिति तो इससे भी खराब है। जालोर 31वें व सिरोही जिला 30वें स्थान पर है। ऐसे में पाली सहित जालोर, सिरोही जिले के जिम्मेदार अधिकारियों को योजना में प्रगति लाने के लिए मुख्यालय से सख्त निर्देश मिले है। योजना के तहत हनुमानगढ़, झुंझुंनु व गंगानगर जिला प्रदेश में पहले तीन स्थानों पर है।
तीन किश्तों में मिलती है प्रोत्साहन राशि
- पहली किश्त गर्भवती महिला के पंजीकरण के बाद मिलेगी एक हजार रुपए।
- दूसरी किश्त दो हजार रुपए गर्भधारण के छह माह बाद।
(कम से कम प्रसव पूर्व एक जांच कराने पर।)
- तीसरी किश्त दो हजार रुपए बच्चे के जन्म के बाद दी जाएगी।
(बच्चे ने बीसीजी, ओपीवी, डीपीटी तथा हैप्टाइटिस बी या इसके समतुल्य पहला चक्र का टीका करवाने पर।)
स्टॉफ की कमी से कार्य हो रहा प्रभावित
महिला पर्यवेक्षकों के 68 पद स्वीकृत है लेकिन वर्तमान में 16 ही काम कर ही है। सीडीपीओ के नौ पद रिक्त पड़े है। कई जगह अधिकारियेां को अतिरिक्त जार्च है। उपनिदेशक का भी पद रिक्त है। इसका भी अतिरिक्त जार्च दे रखा है। स्टॉफ की कमी से योजना में प्रगति उपेक्षित गति से नहीं हुई फिर भी प्रयास जारी है। जिससे की प्रदेश में पाली की स्थिति सुधर सके।
- हरिशचंद पारिख, कार्यवाहक उपनिदेशक, समेकित बाल विकास सेवांए, पाली





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