रोडवेज बस स्टैण्ड-सड़क क्षतिग्रस्त,खस्ताहाल हैं सुलभ सुविधाएं
बीकानेर. केन्द्रीय रोडवेज बस स्टैण्ड एक अर्से से विकास कार्यों को तरस रहा है। बजट के अभाव में जरूरी काम भी नहीं हो पा रहे हैं। इससे बस स्टैण्ड पर यात्रियों को सामान्य सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। यात्रियों को परिसर में जमा कीचड़, सड़कों पर बने गड्ढों व गंदगी से परेशानी उठानी पड़ रही है। सामान्य सुविधाएं (सुलभ सुविधा) भी खस्ताहाल है। जहां बसें ठहरती हैं, उसके समीप बना सुभल कॉम्प्लेक्स लंबे अर्से से बंद है। इससे महिला यात्रियों को अधिक परेशानी होती है। रोडवेज प्रबंधन समस्या के निवारण के लिए मुख्यालय को कई बार लिख चुका है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
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मुख्य प्रवेश की सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है। सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद भी किसी ने इसकी सुध नहीं ली। इससे हर समय मिट्टी उड़ती है। बस में बैठे यात्रियों को श्वांस लेना भी दूभर हो जाता है। बारिश के समय भारी मात्रा में पानी एकत्र हो जाता है। पानी की निकासी सही नहीं होने से बस स्टैण्ड परिसर में कीचड़ फैला रहता है। पिछले दिनों बारिश के बाद हालात बदरत हो गए। इससे बसों के आवागमन में भी परेशानी हुई। सीवरेज आए दिन जाम रहती है। दूषित वातावरण होने से यात्रियों के परेशानी होती है। क्षतिग्रस्त पेशाबघर होने से महिला यात्रियों को मुश्किल हो रही है। वर्कशॉप के पास सुलभ कॉम्प्लेक्स बना हुआ है, लेकिन बीकानेर होते हुए आगे जाने वाली बसों का ठहराव कुछ समय होता है और दूसरी तरफ बने सुलभ कॉम्प्लेक्स तक आने-जाने में ही यात्रियों का समय खर्च हो जाता है।
सांसद तक गुहार
रोडवेज बस स्टैण्ड पर विकास कार्यों के लिए अभी तक किसी तरह का बजट नहीं मिला। रोडवेज प्रबंधन ने इस समस्या से मुख्यालय को अवगत कराने के अलावा क्षेत्रीय सांसद और विधायक से गुहार लगाई, लेकिन स्थिति जस की तस है।
बस स्टैण्ड पर एक सुलभ कॉम्प्लेक्स तो चालू है। यह सही है कि पुरानी सुलभ सुविधा क्षतिग्रस्त है, लेकिन उनकी मरम्मत के लिए बजट का इंतजार है। सड़क निर्माण व अन्य विकास कार्यों के लिए विधायक व सांसद को पत्र लिख चुकी हूं।
इंद्रा गोदारा, आगार प्रबंधक
बस स्टैण्ड पर सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। सफर के लिए पुरानी बसों पर निर्भर हैं। स्टैण्ड पर सामान्य सुलभ सुविधाओं का भी टोटा है। पीने के पानी, साफ-सफाई माकूल नहीं है। विकास कार्यों की मांग कई बार कर चुक हैं।
गिरधारी लाल, श्रमिक नेता





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