सीकर. अधिकारी हों, जनप्रनिधि या समाज के पदाधिकारी, हर कोई एक ही बात कहते हैं तालीम से ही जीवन संवर सकता है। तालीम से ही समाज आगे बढ़ेगा, लेकिन जिले के मदरसों में सरकार की लापरवाही से दुनियावी तालीम ही नहीं मिल रही। मदरसों में सरकारी पुस्तकें नहीं पहुंचने के कारण विद्यार्थी बिना पढ़े ही वापस लौट रहे हैं। इस कारण विद्यार्थियों व अभिभावकों के साथ पैराटीचर भी परेशान हैं। जिले में पंजीकृत मदरसों की संख्या करीब 126 हैं। पैराटीचर्स का कहना है कि अधिकांश मदरसों में पुस्तकें नहीं मिल रही। इस कारण पढ़ाई के साथ नामांकन भी प्रभावित हो रहा है।
केस एक
मोचीवाड़ा रोड स्थित दीन यात मदरसा में कक्षा एक से पांच तक कक्षाओं का संचालन किया जाता है। यहां इस सत्र के लिए एक भी पुस्तक नहीं पहुंची है। यहां करीब 65 विद्यार्थी अध्ययनरत है। पुस्तकें नहीं मिलने से विद्यार्थी परेशान हैं। पिछले वर्ष जून में ही पुस्तकें मिल गई थी।
केस दो
सालासर रोड स्थित मदरसा मदीना में भी कक्षा एक से पांच तक कक्षाओं का संचालन किया जाता है। यहां भी एक भी नई पुस्तक नहीं पहुंची। पुस्तक नहीं पहुंचने के कारण विद्यार्थियों को पुरानी पुस्तकों से जुगाड़ करना पड़ रहा है। पुस्तकें नहीं मिलने से पढाई बाधित हो रही है।
केस तीन
जमींदारान मोहल्ला स्थित मदसा तैफुजुद्दीन में करीब ढाई सौ विद्यार्थी तालीम ले रहे हैं। यह मदरसा कक्षा एक से आठ तक संचालित हैं। शहर इमाम भी इस मदरसे में तालीम देते हैं, लेकिन यहंा भी एक भी पुस्तक नहीं आई।
यह पुस्तक मिलती है
राज्य सरकार की तरफ से मदरसों में हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, पर्यावरण, सामाजिक अध्ययन, विज्ञान व उर्दू की पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है। कक्षा एक से पांच तक में सामाजिक अध्ययन व विज्ञान की पुस्तक नहीं दी जाती। इसके अलावा हर वर्ष पचास प्रतिशत विद्यार्थियों को ही नई पुस्तक दी जाती है। पचास प्रतिशत विद्यार्थियों को पुराने विद्यार्थियों की पुरानी पुस्तकें दी जाती हैं। समस्या यह भी है कि पिछले वर्ष भी करीब पच्चीस प्रतिशत विद्यार्थियों को पुस्तकें नहीं दी गई थी।
कई बार कर चुके मांग
हम कई बार मांग कर चुके। सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते-लगाते परेशान हो गए, लेकिन पुस्तकें नहीं दी जा रही। हमें कहा जाता है आगे से ही पुस्तकें नहीं आ रही, हम कहां से दें। पुस्तकें नहीं मिलने से विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। नामांकन भी प्रभावित हो रहा है। जल्द ही पुस्तकें उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। दो साल से ही समस्या ज्यादा बढ़ी है। पहले नियमित रूप से पुस्तकें मिलती थी।
- जफर अली, जिलाध्यक्ष, जिला मदरसा पैराटीचर यूनियन,सीकर
मांग ही नहीं भेजी
जिन मदरसों ने लिखित में मांग भेजी थी, उन सभी को पुस्तकें उपलब्ध करवा दी गई है। मदरसा बोर्ड ही इसकी सूची भेजता है। अब भी जिस मदरसे को पुस्तक नहीं मिली है, वह लिखित में मांग भेज दे, हम उपलब्ध करवा देंगे।
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ओपी दायमा, कार्यवाहक जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी





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