कोटा. लहसुन तुलाई में राज्य सरकार ने फिर किसानों के साथ दगा कर दिया। लहसुन खरीद के अंतिम दिन तक भी हजारों पंजीकृत किसानों के मोबाइल पर लहसुन तुलाई के मैसेज नहीं आए। किसान मैसेज की पूछताछ करने खरीद केंद्रों पर चक्कर काटते रहे।
शनिवार को भामाशाह मंडी खरीद केंद्र पर दिनभर लहसुन उत्पादक किसानों की आवाजाही लगी रही। खरीद केंद्र प्रभारी किसानों के सवालों के सामने निरुत्तर नजर आए।
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जिनके आए वे भी परेशान
भामाशाह मंडी स्थित खरीद केंद्र पर लहसुन तुलाई के मैसेज प्राप्त किसान भी 4-5 दिन से परेशान हो रहे हैं। इन किसानों का तुलाई के लिए नम्बर ही नहीं आ रहा। उन्हें मंडी परिसर में ही रातें गुजारनी पड़ रही है।
किसानों ने आरोप लगाया कि मंडी के टीनशेडों में खरीदा गया लहसुन भरा है। उन्हें खुले आसमां तले रखना पड़ रहे हैं।
19983 किसानों का लहसुन खरीदा
सूत्रों ने बताया कि राजफेड पोर्टल पर 64 हजार 752 किसानों के पंजीयन हुए हैं। इनमें से 20 हजार 977 को लहसुन तुलाई के मैसेज जारी किए गए हैं। प्रदेश में 19 हजार 983 किसानों ने लहसुन की तुलाई करवाई है।
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एमडी को शिकायत दी, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की: पूर्व मंत्री भारत सिंह
बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत लहसुन खरीद में मोईकलां खरीद केंद्र पर किसानों की वरीयता सूची तोड़ कर पंजीयन क्रमांक पहले लेने का मामला उजागर होने के बाद पूर्व मंत्री भरत सिंह ने राजफैड के अधिकारी व ऑनलाइन सिस्टम पर सवाल उठाए हैं।
पूर्व मंत्री भारत सिंह ने बताया कि खरीद में पारदर्शिता के लिए सरकार ने ऑनलाइन पंजीयन शुरू किए, लेकिन इसमें भी सत्ता पक्ष के विधायकों ने घालमेल कराया।
ऐसे में साफ है कि नेताओं के मिलने वाले किसानों, रिश्तेदारों की उपज, लहसुन की तुलाई हो रही है। गरीब किसान तो आज भी वैसा ही है।
उन्होंने कहा कि मोईकलां खरीद केंद्र पर वरीयता क्रम तोडऩे वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए हमने राजफैड के अधिकारियों, एमडी तक शिकायत कर दी, लेकिन 3-4 दिन बीतने के बाद भी राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई नहीं हुई।
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दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो : नागर
राजफैड अधिकारियों की ओर से लहुसन बेचने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया में हेराफेरी किए जाने के मामले में संसदीय सचिव नरेन्द्र नागर ने कहा कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, किसी रिश्तेदार के लिए मैंने सिफारिश नहीं की। मामले की तह तक जांच होनी चाहिए। राजफैड की ऑनलाइन प्रक्रिया में इस तरह गड़बड़ी करना चिंता की बात है।
गड़बड़ी कैसे हुई और कौन जिम्मेदार है, जांच में इसका खुलासा होना चाहिए। जो मेरा नाम ले रहे वो अधिकारी प्रमाण दें कि किस फोन किया।





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