अजमेर
जिला कलक्टर आरती डोगरा ने कहा आदर्श स्वास्थ्य केन्द्रों (पीएचसी) में ओपीडी मरीजों के साथ भर्ती मरीजों में वृद्धि की जाए। केन्द्रों में मरीजों को भर्ती करने में कोताही बरती जाती है। उन्होंने साफ कहा कि यदि फ्लैगशिप योजनाओं की क्रियान्वित में सुधार नहीं हुआ तो एक्शन लिया जाएगा। जिले में संचालित कुपोषण उपचार केन्द्रों की ओर से कुपोषित बच्चों को पूरा इलाज मिलना चाहिए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. के. के. सोनी ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों एवं योजनाओं की समीक्षा बैठक में की गई। जिला कलक्टर ने भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के पैकेज बढ़ाने तथा उनका बुकिंग प्रतिशत बढ़ाने पर जोर दिया। सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा केन्द्र अराईए पुष्कर एवं पीसांगन के चिकित्सा अधिकारियों को अधिकतम भर्ती मरीजों को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के साथ जोडऩे के निर्देश प्रदान किए।
जिला कलक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के अन्तर्गत प्रत्येक चिकित्सालय एवं स्वास्थ्य केन्द्र के लिए निर्धारित दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। जिला एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रैकिंग में मई माह के दौरान राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यो की सराहना की। साथ ही भविष्य में इसे बेहतर तरीके से करके राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए चिकित्सा अधिकारियों का उत्साहवर्धन किया। राजश्री योजनाए फ्लेगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन में कोताही बरतने पर संबंधित के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी।
उन्होंने कहा कि भिनाय के सराना एवं देवलियाकलां तथा केकड़ी के बघेरा के स्वास्थ्य केन्द्रों के ओपीडी में अपेक्षित सुधार की आवश्यकता है। इसके साथ ही देवलियाकला एवं झीरोता के आदर्श स्वास्थ्य केन्द्र में और अधिक मरीजों को भर्ती कर लाभान्वित किया जाए। इसके साथ साथ नरवर एवं कोटड़ा के आदर्श स्वास्थ्य केन्द्रों में भी भती मरीजों में वृद्धि की जाए।
उन्होंने कहा कि जिले में संचालित कुपोषण उपचार केन्द्रों के द्वारा कुपोषित बच्चों को पूरा इलाज मिलना चाहिए। महिला एवं बाल विकास विभाग के आंगनबाडी केन्द्रों से कुपोषित बच्चों को रेफर करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इन उपचार केन्द्रों में पर्याप्त पोषण सामग्री एवं देखरेख की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। अतिकुपोषित बच्चों को प्रारम्भिक उपचार स्थानीय केन्द्र पर ही दिया जाए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत कम वजन के एवं अन्य जन्मजात कमी वाले बच्चों की पहचान प्रारम्भिक स्तर पर ही की जानी चाहिए। ब्लॉक स्तर पर इन बच्चों के उपचार पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना आवश्यक है।
उपचार के पश्चात इन बच्चों के स्वास्थ्य का समुचित फोलोअप भी किया जाना चाहिए। उपचार के दौरान अपेक्षित सुधार नही होने की स्थिति में इन बच्चों को मेडिकल कॉलेज में तुरन्त रैफर किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए संचालित सॉफ्टवेयर में समस्त फीडिंग समय पर की जाए।





No comments:
Post a Comment