राजसमंद. बारिश शुरू होते ही खेतों पर मक्का और कपास की बुवाई का काम शुरू हो गया है, वहीं बिलों में पानी भर जाने से खेतों और घरों में सांपों का निकलना शुरू हो गया है। जनवरी से अबतक ११६ लोग सर्पदंश से पीडि़त भी हो चुके हैं। हालांकि ऐसे में आवश्यकता है सावधानी बरतने की। गौरतलब है कि जिले में हर वर्ष सैकड़ों लोग सर्पदंश का शिकार होते हैं, इसमें दर्जनों लोग समय से अस्पताल नहीं पहुंचने से अपनी जांन गवां देते हैं। चिकित्सा विभाग का दावा है कि सभी प्राथमिक तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्नैक बाइट का इंजेक्शन है, सर्पदंश का मामला होते ही बिना समय गवांए पीडि़त को अस्पताल जाना चाहिए। विभाग सर्पदंश से होने वाली मौतों का मुख्य कारण अंधविश्वास को मानता है।
केस एक
भीम निवासी टीकमसिंह ने बताया कि वह गत दिवस खेत पर काम करने जा रहा था, तभी एक सर्प खेत की पाली पर पड़ा दिखा।
केस दो
कांकरोली निवासी धापूबाई ने बताया कि वह खेत पर मक्की की फसल बुवाई के लिए गई थी, तभी दो सांप खेत पर लड़ रहे थे, उन्हें देखकर वह डरकर खेत से बाहर आ गई।
जिले में जहरीले सांपों की प्रजातियां
वनविभाग के अनुसार जिले में सापों की 250 से ज्यादा प्रजातियां है। इनमें से चार सांप अत्यधिक जहरीले हैं, जिनमें कोबरा, वाइपर, करेत, रसेल वाइपर हैं।
3 से 5 घंटे में हो सकती है मौत
जिले में पाए जाने वाले सर्प में सबसे ज्यादा जहरीला कोबरा है। इसके डसने पर 3 से 5 घंटे में इलाज नहीं मिलने पर मौत हो सकती है। आधे घंटे के अंदर ही सांस लेने में परेशानी होने लगती है। वहीं वाइपर के डसने पर पीडि़त के शरीर पर सूजन आकर फफोले होने लगते हैं। इलाज नहीं मिलने पर मौत हो जाती है। चिकित्सक बताते हैं कि सांप डस ले, तो तत्काल अस्पताल लें जाएं। ज्यादा देरी होने पर गुर्दे व लीवर पर असर पड़ता है। तत्काल इलाज मिलने पर व्यक्ति के 100 फीसदी बचने की उम्मीद रहती है। जिस जगह से सांप डसे, उसके ऊपर व नीचे की तरफ कपड़े से पट्टी बांध देनी चाहिए, ताकि जहर ज्यादा नहीं फैले। खेत व बीड़ में कार्य करते वक्त लोगों को जूते पहनने चाहिए तथा सतर्कता बरतनी चाहिए।
पांच साल की स्थिति
वर्ष . सर्पदंश. मौत
2014. 232 .4
2015. 18 3. 18
2016. 360 .27
2017. 400. 16
2018. 116. 0
क्या करें उपाय
-सांप के डसे स्थान से ऊपर कपड़े या पतली रस्सी से कसकर बांध दें, ताकि जहर ऊपर नहीं चढ़े।
-सर्पदंश से पीडि़त व्यक्ति को होश में रखने की कोशिश करें। सोने नहीं दें।
-झाडफ़ूक व देवरे आदि के चक्कर में फंसकर समय खराब नहीं करें, जल्दी से जल्दी पीडि़त को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश करें।
अस्पताल पहुंचे ९८ फीसदी की बचती है जान: चिकित्सक बताते हैं कि अस्पताल पहुंचे ९८ प्रतिशत लोग बच जाते हैं, २ प्रतिशत उन लोगों की मौत हो जाती है जो जहर फैलने के ५ घंटे के बाद अस्पताल पहुंचते हैं।
भामाशाह से जुड़े अस्पतालों में भी हो सुविधा
राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान के जिला संयोजक एसएल भांटी का कहना है कि जिले में हर वर्ष सर्प दंश के काफी मामले आते हैं, ऐसे में जिले के सभी भामाशाह से जुड़े निजी चिकित्सालयों में इंजेक्शन सुविधा होनी चाहिए। क्योंकि अस्पताल संचालक इंजेक्शन कीमती होने की बात कह कर लोगों से हजारों रुपए मांगते हैं, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र से आया पीडि़त मनमाने दाम देने के लिए बाध्य हो जाता है।
सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्नैक बाइट के इंजेक्शन मौजूद हैं। बारिश के दिनों में सर्पदंश के मामले ज्यादा बढ़ जाते हैं, लोगों को चाहिए कि पीडि़त को तत्काल अस्पताल ले जाएं, झाडफूंक में समय नहीं गवांए। ज्यादातर मौतें अंधविश्वास के कारण होती हैं।
डॉ. पंकज गौड़, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, राजसमंद है असर





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