बीकानेर. मरुप्रदेश में रियासतकाल से ही पेयजल और वर्षा जल संरक्षण के लिए तालाब, तलाइयां और कुएं प्रमुख रहे हैं। इन जल स्रोतों से ही यहां आमजन और पशु-पक्षी प्यास बुझाते हैं। बढ़ते शहरीकरण और शासन-प्रशासन की अनदेखी से इन जलस्रोतों पर संकट मंडराने लगा है। सार्वजनिक भूमि पर बने तालाब और इसमें बारिश का पानी आने के लिए छोड़ी जाने वाली आगोर भूमि पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहे हैं, इससे तालाबों की आगोर सिकुड़ती जा रही है। प्रशासन भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
शहर में दशकों पुराने तालाबों की आगोर भूमि पर हर साल अवैध निर्माण बढ़ रहे हैं। साथ ही बहाव क्षेत्र में पड़ा कचरा और निर्माण कार्यों का मलबा, अवैध खनन से बने गड्ढे बारिश पानी को तालाबों में पहुंचने से रोक रहा है। तालाबों के आस-पास की आगोर भूमि पर रिहायशी क्षेत्र बढ़ते जा रहे हैं। यहां संसोलाव, हर्षोल्लाव, शिवबाड़ी, सागर, महानन्द, धरणीधर सहित कई तालाबों की आगोर भूमि में अवैध निर्माण की भरमार है। प्रशासन की उदासीनता से अवैध निर्माण तालाबों के मुहाने तक पहुंच गए हैं और पानी आने के अधिकतर रास्ते भी बंद हो गए हैं।
तालाब के आकार अनुसार आगोर
रियासतकाल में आगोर भूमि तालाब के आकार के अनुसार निर्धारित की जाती थी। राजकीय डूंगर कॉलेज के व्याख्याता बृजरतन जोशी ने बताया कि आगोर तालाब के चौतरफा होती है। यह वह भूमि होती है, जहां से बारिश का पानी खाळों (नालों) से तालाब में पहुंचता है। आगोर की ढलान तालाब की ओर होती है।
नियम दरकिनार
तालाबों की आगोर भूमि के संरक्षण को लेकर नियम बने हुए हैं, लेकिन बीकानेर में इनका पालन नहीं हो रहा है। कुछ लोग इन नियमों को तोड़-मरोडकर आगोर भूमि पर अवैध निर्माण कर रहे हैं। नयायालय ने भी सरकार और प्रशासन को आगोर व तालाबों के संरक्षण के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं रुक रहे हैं। इन अवैध निर्माण में बिजली के कनेक्शन तक दिए जा रहे हैं। साथ सड़कें बनाने के साथ अन्य विकास कार्य भी कराए जा रहे हैं।
बहाव क्षेत्र रहे सुरक्षित
जल संरक्षण के पारम्परिक स्रोतों में आने वाले पानी के बहाव क्षेत्र को सुरक्षित और संरक्षित नहीं किया जा रहा है। तालाबों में पहुंचने वाले पानी के बहाव क्षेत्र के सुरक्षित रहने से ही तालाब सुरक्षित रह सकते हैं। संसोलाव आगोर एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के मदन गोपाल छंगाणाी बताते हैं कि सरकार की के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। लगातार अवैध निर्माण हो रहे हैं और आगोर सिकुड़ रही है।
आगोर भूमि हुई कम
ग्राम रिड़मलसर पुरोहितान के ऐतिहासिक तालाब की ३८२ बीघा आगोर है। इस आगोर भूमि पर बायपास के लिए सड़क बनाई जा रही है। इससे आगोर की भूमि कम हो गई है और तालाब में वर्षा जल की आवक प्रभावित हो रही है। इस तालाब की आगोर को लेकर उच्चतम न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है।





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