नई दिल्ली। असम में नागरिकता को लेकर उठे मामले पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि कुछ लोग इस मुद्दे पर बेवजह डर का माहौल बना रहे हैं। बता दें कि सोमवार को जारी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अंतिम मसौदे में 40 लाख नागरिकों के अवैध होने का दावा किया गया है। गृहमंत्री ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह निष्पक्ष बताया है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में गलत बातें न फैलाई जाएं। ये तो सिर्फ ड्राफ्ट है ये अंतिम सूची नहीं है।
Some people are unnecessarily trying to create an atmosphere of fear. This is a completely impartial report. No misinformation should be spread.This is a draft and not the final list: Home Minister rajnath singh #NRCAssam pic.twitter.com/w1AN6bGfO9
— ANI (@ANI) July 30, 2018
Even someone whose name is not in the final list can approach the foreigners tribunal. No coercive action will be taken against anyone, hence there is no need for anyone to panic: Home Minister Rajnath Singh #NRCAssam pic.twitter.com/FID1naBChb
— ANI (@ANI) July 30, 2018
विदेशी ट्रिब्यूनल में कर सकते हैं अपील
गृह मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक जिन लोगों के नाम इस अंतिम मसौदे में शामिल नहीं हैं, वे विदेशी ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं। जिनके नाम छूटे हैं, उन पर कोई भी न्यायिक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसे लेकर किसी भी रूप में परेशान होने की जरूरत नहीं है।
ये है पूरा मामला
दरअसल सोमवार को एनआरसी ने अंतिम मसौदा जारी कर दिया है। इसमें कुल 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोग नागरिकता के योग्य पाए गए हैं। जबकि 40 लाख लोगों के वहां अवैध रूप से रहने का दावा किया जा रहा है। यह आंकड़े एनआरसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जारी किए हैं. एनआरसी का कहना है कि यह सिर्फ मसौदा है, इसे अंतिम सूची नहीं माना जाए। एनआरसी के रजिस्ट्रार जनरल शैलेश ने जानकारी दी है कि जिन लोगों का नाम पहले मसौदे में था और अंतिम मसौदे से गायब है, उन्हें एनआरसी की ओर से व्यक्तिगत पत्र भेजा जाएगा। इसके जरिये वह अपना दावा पेश कर सकेंगे।
ये 40 लाख लोग वे हैं जो एनआरसी में कागजी वैध दस्तावेज की कार्रवाई पूरी नहीं कर सके, जिसके चलते उन्हें अवैध ठहराया गया है। 40 लाख लोगों में वे भी शामिल हैं, जिनके पास 25 मार्च 1971 से पहले की नागरिकता के कोई भी वैध दस्तावेज नहीं हैं, जिसके चलते एनआरसी ने उन्हें वैध नागरिक नहीं ठहराया।





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