झुंझुनूं. जिले के खेतड़ी का वन क्षेत्र अब जल्द ही फिर से शेरों की दहाड़ सुनाई देगी। वन विभाग की ओर से इसके लिए सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। पूर्व में भी राजा रजवाड़ों के समय इस वन क्षेत्र में शेरों की उपस्थित थी। समय के साथ-साथ इस वन क्षेत्र से जंगली जानवर लप्त होते चले गए। अब फिर से खेतड़ी को रणथम्भौर अभ्यारणय की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार वन विभाग की ओर से खेतड़ी बसियाल खेतड़ी एवं बसियाल खेतड़ी बागौर कन्जर्वेशन रिर्जव क्षेत्र में लॉयन सफारी क्षेत्र एवं लॉयन सफारी क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव भेजा है।प्रस्ताव में बताया है कि दोनों वन क्षेत्र करीब 11084 हैक्टेयर है।
जिसे सरकार ने संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया है। इस वन क्षेत्र में जैव विविधता काफी महत्वपूर्ण है और इस क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के पेड़ पौधे है।ऐसे में यहां पर विभिन्न तरह के वन्य जीवों की उपस्थिति भी हो सकती है। इसके लिए प्रदेश के चिडिय़ाघरों में होने वाले लॉयन के बच्चों को एवं अन्य राज्यों से जानवरों को यहां लाकर शेरों का पुर्नवास केन्द्र बनाया जा सकता है।
पैंथर एवं शेर की आवाजाही की प्रबल संभावना
यह वन क्षेत्र दिल्ली से सटा हुआ है ऐसे में अलवर सरिस्का आदि क्षेत्रों से पैंथर एवं शेर की आवाजाही की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। यहां पर पूर्व में भी शेर एवं चीते के आने की जानकारी मिली है।
अब तक यह हुआ
यहां पर रणथम्भौर की तर्ज पर इसे अभ्यारण्य बनाने के लिए प्रयास शुरू हो गए है। इसको लेकर काफी कुछ काम भी हो गया है। इसके लिए करीब सात हजार हैक्टेयर में कनर्वेशन रिर्जव को राज्य सरकार ने गत वर्ष अपनी स्वीकृति दे दी है। इसके लिए 230 लाख का बजट भी स्वीकृत किया जा चुका है। यहां पर अब तक 5 व्यू पोईन्टों एवं हिलोक्स का निर्माण किया गया है। इसके अलावा इस सभी व्यू पाईन्टस को इंटरलिंक कर दिया है। ताकि रास्ते में कोई टकराव की स्थिति नहीं हो। वहीं वन विभाग की मॉनिटरिंग के लिए निरीक्षण पथ भी बनाए गए है। वहीं बीस किलोमीटर का एक ट्रेक भी निर्मित किया गया है। जिस पर बेरियर लगाए गए है। यहां पर सांभर एवं चीतल भी छोड़े जाएंगे।
झुंझुनूं में करीब 405 वर्ग किलोमटर वन क्षेत्र है इसमें से करीब पचास फीसदी वन क्षेत्र करीब 200 वर्ग किलोमीटर केवल खेतड़ी क्षेत्र में है। ऐसे में वहां पर घने जंगल को देखते हुए वन्य जीव अभ्यारण्य की ाकफी संभावनाएं है। इसी को लेकर वन विभाग ने अपने प्रयास तेज कर दिए है। यहां पर वल्र्ड एनिमल्स ट्यूरिस्ट पार्क की संभावनाओं को देखते हुए इसके लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू हो गया है।
अभी इन वन्य जीवों की है उपस्थित
खेतड़ी के जंगलों में गत दिनों दो एक पैंथर का जोड़ा लाकर छोड़ा गया है। ताकि यहां पर इनका कुनबा पनप सके। इसके अलावा सांभर, तितर, बटेर, पाटा गोई, चिंकारा, नील गाय, डेजर फोक्स, नेवला आदि की उपस्थिति है।
सांभर चीतल की योजना
भविष्य में यह वन्य क्षेत्र में सांभर चीतल को भी लाकर छोडऩे की तैयारी की जा रही है। इसके लिए राज्स सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। पूर्व में इस वन क्षेत्र में टाइगर की आवाजाही रही है। ऐसे में सांभर एवं चीतल की प्रजाति भी यहां पर रही होगी।
इनका कहना है..
हमने खेतड़ी वन क्षेत्र को अभ्यारण्य के रुप में विकसित करने का काम चल रहा है। हाल ही में दो पैंथर भी लाकर छोड़े हैं। ट्रेक आदि का निर्माण किया जा चुका है। इसे शेरों का पुर्नवास केन्द्र बनाया जा सकता है यहां पर सभी व्यवस्था उनके अनुकुल है।इसके लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
- आर. एन.मीना, उपवनसंरक्षक वन विभाग झुंझुनूं





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