चित्तौडग़ढ. सड़क पर विलुप्त हो रही गिद्ध प्रजाति का घायल पक्षी दिखा तो मन में सेवा के भाव जाग उठे। घायल गिद्ध के पीछे पड़े श्वानों को भगा उसे बचाया और पहले घर ले जाकर उसकी सेवा की। बाद में पशु चिकित्सालय में उपचार करा उसे वन विभाग को सौंप दिया गया। शहर के कीरखेड़ा क्षेत्र में रहने वाले कमलेश सालवी को बुधवार दोपहर बूंदी रोड पर नाडोलिया गुर्र्जर बस्ती के पास दोपहर करीब २.३० बजे दुपहिया वाहन से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्हें अचानक सड़क पर एक घायल गिद्ध दिखा जिसके पीछे कुछे कुत्ते भी लगे हुए थे। पक्षी व पुश सेवा में विश्वास रखने वाले कमलेश ने तुरन्त गिद्ध की जिंदगी बचाने का संकल्प लिया। उन्होंने कुत्तों को भगाने के बाद घायलावस्था में बैचेन दिख रहे गिद्ध को पकडऩे के लिए उसके पैरों में धागा बांध एक बोरे में बंद किया और घर तक लाए। यहां उसे निकाल पानी पिलाया और खाने के लिए दाना भी दिया। इसके बाद कुछ सहज हुए गिद्ध को उपचार के लिए वे शाम ४ बजे पशु चिकित्सालय लेकर पहुंचे। यहां पशु चिकित्सक डॉ. धर्मेन्द्र सोन ने उनका उपचार किया। इसके बाद कमलेश व कुछ लाोग गिद्ध को लेकर वन्य जीव संरक्षण कार्यालय पहुंचे एवंं वन्यजीव कर्मियों को सौंप दिया। घटना के बाद चित्तौड़ से बाहर चले गए कमलेश ने शुक्रवार को मीडिया को इसके बारे में जानकारी दी।
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किले के पीछे दिखते है गिद्ध
गिद्ध प्रजाति राजस्थान में विलुप्त प्राय: है। इसके संरक्षण के प्रयास भी हो रहे है। चित्तौड़ में दुर्ग के पीछे के क्षेत्र में अब भी इनकी मौजूदगी है। इस क्षेत्र में अक्सर गिद्धों को आसमान में उड़ते हुए देखा जा सकता है।
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घायल गिद्ध को पक्षी प्रेमी मेरे पास उपचार के लिए लाए थे। उसे ड्रिप चढ़ाने के साथ स्वस्थ किया गया। इसके बाद उसे वन विभाग को सौंपा गया। गिद्ध संरक्षण के लिए इस तरह के प्रयास सराहनीय है।
डॉ. धर्मेन्द्र सोन, पशु चिकित्सक, चित्तौडग़ढ़





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