-दुर्गवासियों का दावा झूठ बोल रहे हैं गार्ड
-भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने बोरिंग मशीन को बैरंग लौटाया
चित्तौडग़ढ़. विश्व विरासत में शुमार चित्तौड़ दुर्ग स्थित फतेहप्रकाश महल पहुंची बोरिंग मशीन को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने बोरिंग की अनुमति नहीं होने का हवाला देकर बैरंग लौटा दिया। इस दौरान वहां पहुंचे गार्ड सुपरवाइजर ने आरोप लगाया कि लोगों ने उसके व अन्य गार्ड के साथ मारपीट की और उसकी बंदूक छीनने का प्रयास किया। दुर्गवासियों ने इस आरोप को झूठा करार दिया। दुर्ग स्थित फतेहप्रकाश महल पर्यटन विभाग के अधीन है और यहां ट्यूबवैल खुदवाने के लिए विभाग ने जिला कलक्टर की अनुमति लेकर मंगलवार शाम बोरिंग मशीन मंगवाई थी। जानकारी मिलने पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के वरिष्ठ संरक्षण सहायक सिद्धार्थ वर्मा ने महल के प्रभारी हिमांशु से बातचीत की और एएसआई से बोरिंग की अनुमति नहीं होने का हवाला देकर बोरिंग मशीन को बैरंग लौटा दी। इस दौरान वहां गार्ड सुरपरवाइजर दीपक पालीवाल व अन्य गार्ड को भी भेजा गया। इधर दुर्गवासी भी यह सोचकर वहां पहुंच गए कि पार्षद की सिफारिश पर स्कूल में ट्यूबवैल खोदने के लिए बोरिंग मशीन आई है। पालीवाल ने आरोप लगाया कि इन लोगों ने उसके सहित गार्ड राधेश्याम तेली, बगदीराम, गोपाल मीणा के साथ मारपीट की। राधेश्याम की वर्दी फाड़ दी और पालीवाल की बंदूक छीनने का प्रयास किया। दूसरी तरफ दुर्गवासियों का कहना था कि गार्ड झूठ बोल रहे हैं, किसी ने भी उनके साथ मारपीट नहीं की। सूचना मिलने पर किला चौकी प्रभारी भूरसिंह जाप्ते सहित मौके पर पहुंच गए।उनका कहना था कि गलतफहमी के चलते यह घटनाक्रम हो गया पर मारपीट किसी ने नहीं की। पार्षद रजनीश भट्ट ने कहा कि उन्हें भी मारपीट जैसे घटनाक्रम की जानकारी नहीं है।
हमने की है सख्ती
वरिष्ठ संरक्षण सहायक वर्मा ने बताया कि दुर्ग पर पर्यटकों की तरफ से काफी शिकायतें आ रही थी। इसके लिए दुर्ग के विभिन्न स्मारकों पर उन गाइड और फोटोग्राफर्स का प्रवेश बंद कर दिया है, जिनके पास लाइसेंस नहीं है उन्हें टिकट लेकर ही जाना होगा। उन्होंने बताया कि २८ जून को भी जटाशंकर मंदिर में रात को टाइल्स लगाने का प्रयास करने पर पवननाथ व नारायणसिंह के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दी थी। अगले दिन कुछ लोगों ने राजकार्य में बाधा डाली और धमकियां दी, उनके खिलाफ भी रिपोर्ट दी है।
बुकिंग के पास न हो भीड़
वर्मा ने बताया कि उन्होंने पुलिस को प्रार्थना-पत्र देकर यह भी मांग की है कि दुर्ग पर विभाग के बुकिंग काउन्टर में पैसा रहता है, इससे वहां कोई भी घटनाक्रम हो सकता है, ऐसे में काउन्टर के पचास मीटर दायरे में भीड़ नहीं हो, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बताया कि दुर्ग पर अधिकृत फोटोग्राफर्स की संख्या सौ है।
अब नहीं होगी गड़बड़
वर्मा ने बताया कि पहले स्मारक देखने के बाद लोग अपना टिकट दूसरों को दे देते थे और वे उसी टिकट से स्मारक में प्रवेश कर जाते थे, ऐसे में आर्थिक नुकसान होता था। अब स्मारकों पर तैनात कर्मियों को पंचिंग मशीनें दे दी गई है। टिकट पंच होने के बाद इसका पुन: उपयोग कोई भी नहीं कर सकेगा।
दुर्ग पर है १३६ अतिक्रमण
वर्मा ने बताया कि दुर्ग पर वर्ष २०११ से लेकर २०१८ तक कुल १३६ अतिक्रमण चिन्हित किए हुए है, जिनके बारे में अतिरिक्त जिला कलक्टर को सूची दी जा चुकी है, वहीं पुलिस को भी रिपोर्ट दी हुई है। नागचण्डेश्वर मंदिर के आसपास अतिक्रमण को लेकर भी पुलिस को तीन बार रिपोर्ट दी जा चुकी है।





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