लालसोट. शहर के गौरव पथ स्थित कोली की कोठी चौराहे पर रात को अज्ञात जनों ने सावित्रीबाई फुले की प्रतिमा लगा दी। रविवार सुबह प्रशासन व पुलिस अधिकारियों को मामले की जानकारी मिली तो वे सकते में आ गए। क्षेत्र में प्रतिमा लगाने को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा।
जानकारी के अनुसार रात को कोली की कोठी चौराहे पर रोड के मध्य में पक्के स्टेज का निर्माण करते हुए प्रतिमा लगा दी। इसके बाद प्रतिमा पर माल्र्यापण व पुष्प वर्षा भी की गई। सुबह मौके पर उपखण्ड अधिकारी नवरत्न कोली, पुलिस वृत्ताधिकारी मोहनलाल वर्मा, एसएचओ सुरेन्द्र मीना मौके पर पहुंचे।बाद में दिनभर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच वार्ताओं का दौर जारी रहा।
पालिका अध्यक्ष जगदीश सैनी समेत कई जनों से अधिकारियों ने कहा कि रोड के बीच इस तरह प्रतिमा लगाना न्यायोचित नहीं है। इससे दुर्घटनाओं का अंदेशा रहेगा। अधिकारियों ने बताया कि प्रतिमा को रोड के बीच से सम्मानपूर्वक हटाकर एक ओर लगा दिया जाए। अधिकारियों ने सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता को भी पुलिस थाने में बुलाकर चर्चा की। मौके पर पुलिस प्रशासन ने पुलिस जाप्ता तैनात कर दिया। एसडीएम नवरत्न कोली ने बताया कि मामले की जांच जारी है। इसके बाद नियमानुसार कार्य होगा। (नि.प्र.)
गौरतलब है कि सावित्री बाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री थीं। सावित्रीबाई भारत के प्रथम कन्या विद्यालय में प्रथम महिला शिक्षिका थीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य की अग्रदूत माना जाता है। 1852 में उन्होंने अछूत बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की।
सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। वे एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदिकवियत्री के रूप में भी जाना जाता था।
इसी स्थान पर हुई थी पांच जनों की मौत
जिस स्थान पर प्रतिमा लगाई है, वहां करीब तीन माह पूर्व बजरी से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने एक ही परिवार के पांच जनों को कुचल कर मौत की नींद सुला दिया था। घटना के बाद यहां प्रशासन ने दुर्घटनाओं को रोकने के लिए चार स्पीड ब्रेकर भी बनावाए थे।





No comments:
Post a Comment