सीकर.
सीकर में पुरोहितों की ढाणी स्थित मदन लाल सैनी का घर। शाम के करीब सवा तीन बजे हैं। पत्नी पतासी देवी चाय बना रही है, कोटा से आई बेटी एकता टीवी देख रही है। अचानक पतासी देवी के पास बेटे मनोज का फोन आता है, कहता है मम्मी बड़ी खुशखबरी है। पापा अध्यक्ष बन गए। फिर क्या था चोरों तरफ खुशियां। मिठाई बंटनी शुरू हो गई। कभी लड्डू आ रहे हैं तो कभी पेड़े।
घर पर देखते ही देखते अपनों की एकत्रित हो गई। फोन घनघनाने लग गए। टीवी चैनल व सोशल मीडिया पर बे्रकिंग आनी शुरू हो गई। घर पर पटाखे छोड़े गए। फिर घर की महिलाओं ने देसी घी की दीप जलाए, मंगल गीत गाए। रंग गुलाल उड़ाया गया। मानों घर में होली व दिवाली साथ ही आ गई। शाम को डीजे बजाकर जमकर खुशियां मनाई गई।
जांटी की छंगाई
पत्नी ने बताया कि वे बिल्कुल जमीन से जुड़े हुए हैं। राज्यसभा सदस्य बनने से कुछ माह पहले वे एक दिन खेत पर जांटी की छंगाई कर रहे थे, कुल्हाड़ी की हाथ में ऐसी चोट लगी कि ऑपरेशन करवाना पड़ गया था।
छह भाइयों में सबसे बड़े, बस में ही सफर
मदन लाल सैनी छह भाइयों में सबसे बड़े हैं। भाई गोपाल, महावीर व जगदीश ने भी खुशियां जताई, जबकि ओमप्रकाश का निधन हो चुका। बेटा मनोज जयपुर हाईकोर्ट में वकालत करता है। छह बेटियां हैं। राज्यसभा सदस्य बनने से पहले वे अधिकतर सफर रोडवेज बस में ही करते रहे हैं।





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