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PM मोदी के जयपुर आगमन से पहले बैंसला अचानक पहुंचे पाली, इस मुद्दे को लेकर कर रहे चर्चा

पाली। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के संयोजक डॉ. कर्नल किरोड़ीसिंह बैंसला बुधवार को पाली पहुंचे। बैंसला का जैतारण व मठ टोल नाके के समीप समाज के लोगों की ओर से स्वागत भी किया गया।

 


समाज के कानाराम गुर्जर ने बताया कि कर्नल बैंसला का आज बाली कस्बे में रबारी समाज के एक समारोह में शामिल होने का कार्यक्रम है। इस दौरान वे आरक्षण के मुद्दे को लेकर जिले के जैतारण, बम्बोली, देवडूंगरी सहित अन्य गांवों में पहुंचकर समाज के लोगों से चर्चा कर रहे है। बैंसला का जैतारण व मठ टोलनाके के समीप गुर्जर समाज के लोगों ने स्वागत भी किया। बैंसला के साथ गुर्जर आरक्षण आंदोलन समिति के महामंत्री शैलेन्द्र धाबाई, उम्मेदसिंह रेबाड़ी, अतरसिंह गुर्जर, विजय बैंसला, देवाराम कटारिया, देवसेना के अध्यक्ष मोतीलाल गुर्जर, जोधाराम, पप्पूराम, जगदीश गुर्जर शामिल थे।

 


उधर, विधानसभा चुनाव को लेकर काउन्ट डाउन शुरू हो चुका है। राजनीतिक दलों ने चुनाव लड़ने को लेकर क्षेत्र में तैयारी के साथ ही बजट को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। जहां सत्ताधारी दल भाजपा में बजट को लेकर कोई संकट नजर नहीं आ रहा।

 


वहीं प्रदेश कांग्रेस में बजट की कमी को लेकर प्रदेश के मुखिया के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं। पिछले दिनों एक कार्यक्रम में भी जहां पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि टिकट वितरण के साथ नेताओं के चुनाव लड़ने को लेकर हैसियत भी देखी जाएगी, वहीं प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा था कि चिंता नहीं करें, बस चुनाव तैयारी में जुट जाएं।

 


चुनावी बजट की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस में प्रयास तेज हो चुके हैं। हालांकि सत्ता से बाहर होने के चलते कांग्रेस को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। यह जिम्मेदारी पूरी तरह पायलट के कंधों पर है। वैसे प्रदेश की राजनीति में देखा जाए तो आधे से कुछ कम टिकट के दावेदारों में वरिष्ठ नेता हैं, जिन्हें टिकट मिलना तय है। उन्हें चुनावी खर्च की भी चिंता नहीं। वहीं आधे से ज्यादा टिकट क्षेत्र की स्थिति को देखकर दिए जाते हैं। इनमें 10 से 15 टिकट धनबल से सामथ्र्य लोगों के पास पहुंचते हैं। सूत्रों की मानें तो प्रदेश के 200 टिकटों में से 40 से 50 सीटें ऐसी हैं, जहां ऐसे नेताओं को भी टिकट देने पड़ेंगे, जिनके पास चुनाव लड़ने को लेकर पर्याप्त पैसा नहीं लेकिन क्षेत्र में पकड़ अच्छी है। इन नेताओं के लिए पार्टी को ही हर हाल में बजट की व्यवस्था करनी होती है। वैसे पार्टी का फोकस पूरी तरह क्षेत्रीय पकड़ के साथ हैसियत देखने पर भी रहेगा।

 


दोनों दलों ने बांटी थी मोटी रकम
राजस्थान में वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनावों को देखा जाए तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों में अपने उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए मोटी रकम बांटी थी। इस बार के हालात को देखें तो भाजपा से कांग्रेस पिछड़ती नजर आ रही है। जहां भाजपा में इस बार भी उम्मीदवारों के लिए बजट की पर्याप्त व्यवस्था नजर आ रही है। वहीं कांग्रेस पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है। सत्ता से बाहर होने से इस बार पार्टी को बजट जुटाने को लेकर मशक्कत करनी पड़ रही है।

 


सत्ता जाते ही खर्च में कटौती
प्रदेश कांग्रेस के माहौल को देखा जाए तो सत्ता से बाहर होते ही चाय-नाश्ते के बजट में एकसाथ भारी कटौती की गई थी। हर किसी पदाधिकारी को आज भी पीसीसी के खर्चे से चाय-कॉफी मंगाने का अधिकार नहीं है। जबकि सत्ता में रहते ऐसा नहीं था। आज यदि किसी कमरे का एसी भी खराब होता है तो नेताओं को एसी ठीक होने के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है।

 


कांग्रेस ने मांगा लेखा जोखा
उधर चुनाव नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस ने पार्टी के 39 जिलाध्यक्षों ने अब तक किए गए काम का लेखा जोखा मांगा है इसके लिए सभी जिलाध्यक्षों को एक फार्म सौंपा गया है जिसमें क्रमबद्ध तरीके से एक के बाद एक करीबन दो दर्जन कॉलम में जवाब मांगा है। इन फार्म को भरकर पांच दिन में प्रदेश नेतृत्व को सौंपना है जिसके आधार पर एक रिपोर्ट तैयार होगी और इसी आधार पर राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जिलाध्यक्षों से संवाद करेगें।

 


भरना होगा दो पेज का फार्म
सभी जिलाध्यक्षों को दो पेज का एक फार्म दिया गया है जिसमें नाम, पते और जिले की जानकारी के साथ ही जाति भी पूछी गई है और पार्टी में कब से हैं और उनके कार्यकाल में कितने चुनाव हुए जिसमें जीत हासिल की और जिलाध्यक्ष रहते या पहले कभी चुनाव लड़ा है या नहीं जिसमें जीत या हार का कितना मार्जिन रहा है। इसी के साथ संगठनात्मक तौर पर बूथ कमेटियों तक की जानकारी देनी है।

 


राहुल का दौरा तय नहीं
चुनावी साल में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने मोर्चा खोल रखा है और इसी वजह से अगस्त में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के भी जयपुर आने का कार्यक्रम है और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी जयपुर आने का कार्यक्रम बनाया जा रहा है लेकिन अभी तक राहुल के जयपुर आने का कार्यक्रम तय नहीं हुआ है लेकिन प्रदेश स्तर पर राहुल के दौरे की तैयारियां शुरू हो गई है और जिलाध्यक्षों को भेजे गए फार्म को भी इसी से जोड़ा जा रहा है।

 

पायलट ने भी ली बैठक
राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे को बुधवार को प्रदेश कांग्रेस सचिन पायलट ने भी पीसीसी जिलाध्यक्षों की बैठक लेकर जिलाध्यक्षों से कामकाज का फीडबैक लिया था। आनन फानन में बुलाई गई में 39 में से आधे ही जिलाध्यक्ष बैठक में मौजूद रहे,जिनसे प्रदेशाध्यक्ष ने चर्चा की।



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