भुवनेश पंड्या/ उदयपुर . विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देशभर के विश्वविद्यालय को जारी पत्र में आपसी व्यवहार में नमस्ते, नमस्कार, श्रीमान, महोदय, मान्यवर, कृपया, धन्यवाद...जैसे शब्दों का प्रयोग करने एवं हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग की नसीहत दी है। वैश्विककरण के दौर में जहां पूरी दुनिया का शिक्षा जगत अंग्रेजी माध्यम के जरिये जुड़ चुका है, इन परिस्थितियों में भी हिन्दी के प्रयोग के लिए इस तरह का सुझाव देना न केवल असामान्य बात है, बल्कि प्रशंसनीय कदम है। यूजीसी ने पत्र में उल्लेख किया है कि कार्यालयों में राजभाषा का प्रयोग गर्व के साथ किया जाए। अधिकारी व कर्मचारी पत्र-व्यवहार में राजभाषा का उपयोग करें। राजभाषा के स्थान पर यदि हम विदेशी शब्दों का प्रयोग करते रहे, तो राजभाषा का गौरव कैसे बढ़ेगा।
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विदेशी शब्दों का प्रयोग अहितकर
यूजीसी की शिक्षा अधिकारी मेघा कौशिक ने लिखा है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय में १४ मई को मानव संसाधन विकास मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में सदस्य हरवीरसिंह शास्त्री ने यह सुझाव दिए थे। इसे लेकर यह पत्र जारी किया गया है। यहीं नहीं उन्होंने परिवार में भी राजभाषा के उपयोग की सलाह दी है। जैसे माता-पिता, बहन, चाचा, चाची जैसे शब्दों को राष्ट्रीय बता इनका उपयोग करने का लिखा है। अनेक परिवारों में विदेशी शब्दों का प्रयोग किया जाता है, ये प्रयोग बहितकर हैं। सामाजिक जीवन में राजभाषा का प्रयोग होना चाहिए। परस्पर संवाद राजभाषा में करने, पत्र व्यवहार हिन्दी में करने, भाषण भी हिन्दी में करने जैसे निर्देश दिए हैं।
हिन्दी का प्रयोग करना बेहतर
राजभाषा का प्रयोग करना बेहतर है, राजभाषा के नियमित उपयोग करने के लिए समय-समय पर लिखा जाता है। प्रयास किया जाता है, कि ज्यादा से ज्यादा कार्यो में हिन्दी ही अलम मंे लाई जाए।
एचएस भाटी, रजिस्ट्रार, एमएलएसयू उदयपुर





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