शैलेन्द्र शर्मा/जयपुर. राज्य में सड़क सुरक्षा के लिए तहसील स्तर पर चलाए गए हेलमेट जागरुकता कार्यशाला के राहत भरे नतीजे देखने को मिले हैं। परिवहन विभाग की रोड सेफ्टी सेल और सेंटर फॉर रोड सेफ्टी की ओर से यह कार्यशाला दिसंबर 2017 से मार्च 2018 तक 13 जिलों की 70 पंचायत समितियों में हुआ। चार महीने की इस कार्यशाला के बाद इन जिलों में अन्य जिलों के मुकाबले सड़क हादसे इस साल 8.27 प्रतिशत घटे हैं।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को अलग-अलग कैमरों में कैद हुए खतरनाक सड़क हादसे दिखाए गए। इनके जरिए बताया गया कि यातायात नियमों के उल्लंघन और लापरवाही के कारण हुए हादसों में किस तरह लोगों की मौत हुई। कहीं ओवरस्पीड, कहीं हेलमेट नहीं पहनने तो कहीं नशे में वाहन चलाने के कारण हादसा हुआ और पलभर में मौत सांसें छीन ले गई। खौफनाक हादसों के सीसीटीवी फुटेज देख प्रतिभागियों के रौंगटे खड़े हो गए।
आंकड़ों पर नजर
आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में मार्च से मई 2017 में कुल 5970 हादसे हुए और 2859 मौतें हुई। मार्च से मई 2018 में 5963 हादसों में 2745 लोगों की जान गई। जिन 13 जिलों में कार्यशाला हुई, उनकी तुलना में अन्य 20 जिलों में हादसे अधिक सामने आए। मार्च से मई 2017 में जहां इन 13 जिलों में 2581 हादसों में 1342 लोगों की जान गई। वहीं इन्हीं 13 जिलों में इस साल मार्च से मई तक 2472 हादसों में 1231 लोगों की मौत हुई। यानी 111 मौतें कम हुई। दोपहिया वाहन चालकों की मौत में भी 40 की कमी आई।
अधिकांश को नहीं थी जानकारी
कार्यशाला से पहले सभी प्रतिभागियों के मूल्याकंन के लिए प्रश्न पत्र दिया गया। इसमें सड़क सुरक्षा, दुर्घटना क्षेत्र, वाहनों की गति सीमा, हेलमेट की गुणवत्ता, हेलमेट व सीट बेल्ट के उपयोग, यातायात नियमों के उल्लंघन सहित गुड सेमेरिटन से जुड़े 10 प्रश्न थे। कॉपी जांची तो पता चला कि अधिकांश लोगों को इनकी जानकारी ही नहीं थी। सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट 'रोड एक्सीडेंट इंन इंडिया' के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में हादसे अधिक होते हैं। सड़क हादसों में दोपहिया वाहन चालको की संख्या ज्यादा है।
इन जिलों में हुई कार्यशाला
जयपुर सहित अजमेर, पाली, बीकानेर, चित्तौडगढ़़, भरतपुर, सीकर, श्रीगंगानगर, नागौर, सिरोही, जोधपुर, टोंक और दौसा की 70 पंचायतों में यह कार्यशाला हुई। इनमें 7867 प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यशाला में इन पांच नियमों के उल्लंघन पर जोर दिया गया। इनमें गति सीमा से तेज वाहन चलाना, नशे में वाहन चलाना, लालबत्ती का उल्लंघन करना, मोबाइल फोन का उपयोग करना और ओवरलोडिंग व मालवाहक वाहनों में सवारी बैठाना शामिल थे। पूर्व डीजीपी एवं निदेशक, सेंटर फॉर रोड सेफ्टी, सरदार पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ पुलिस सिक्योरिटी एंड क्रिमिनल जस्टिस मनोज भट्ट के अनुसार तहसील स्तरीय हेलमेट जागरुकता कार्यशाला का काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है। ऐसी कार्यशाला अन्य जिलों में करने के लिए परिवहन विभाग को प्रस्ताव भेजा है।





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