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विवादों की भर्ती बनी रीट, अब 14 प्रश्नों में बोनस की मांग


सीकर. प्रदेश की सबसे बड़ी रीट भर्ती परीक्षा विवादों की भर्ती बन गई है। प्रथम लेवल में चयनितों को नियुक्ति अभी तक मिली नहीं। कई महीनों बाद न्यायालय की दहलीज से बाहर निकली द्वितीय लेवल भर्ती फिर दुबारा से विवादों में फंसती नजर आ रही है। द्वितीय लेवल में अब ताजा विवाद 14 प्रश्नों में बोनस देने का है। अभ्यर्थियों ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की उत्तर कुंजी पर सवाल उठाते हुए बोनस अंक देने की मांग की है। हालांकि न्यायालय ने इस मामले में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को 15 दिन का समय दिया है।

आंसर की और बोनस सबसे बड़ी वजह
रीट प्रथम व द्वितीय लेवल में विवाद की सबसे बड़ी वजह आंसर की है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से जारी आंसर की पर अभ्यर्थियों ने कई सवाल उठाए है। संशोधित आंसर की से संतुष्ट नहीं होने पर अभ्यर्थियों ने न्यायालय की शरण ली। अभ्यर्थियों का कहना है कि सभी गलत प्रश्नों में बोनस अंक मिलने चाहिए। इधर, एक्सपर्ट का कहना है कि बोर्ड प्रशासन की ओर से यदि आपत्ति निस्तारण के दौरान सावधानी बरती होती तो अब भर्ती नहीं अटकती।

विशेष शिक्षा के अभ्यर्थियों को राहत

विशेष शिक्षा के अभ्यर्थियों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। अभ्यर्थियों ने पिछले दिनों सामाजिक विज्ञान विषय में पढ़ बढ़ाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री को ज्ञापन दिया था। अभ्यर्थियों ने तर्क दिया कि अंग्रेजी विषय में आवेदक कम होने के कारण पद रिक्त रहने की संभावना है। इसलिए इन पदों को सामाजिक विज्ञान में शिफ्ट किया जाए। इसके बाद सरकार ने सामाजिक विज्ञान विषय में 100 पद बढ़ाए। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय ने आदेश भी जारी कर दिए है। विशेष शिक्षा बेरोजगार संघ के बलराम मीणा ने बताया कि इससे विशेष शिक्षा के बेरोजगारों को काफी फायदा मिलेगा।

प्रथम लेवल चयनितों को 27 का इंतजार
रीट प्रथम लेवल में चयनित अभ्यर्थियों को अब 27 अगस्त का इंतजार है। 27 अगस्त को रीट प्रथम लेवल के मामले में सुनवाई होगी। इसके बाद न्यायालय से हरी झंडी मिलने के बाद चयनित बेरोजगारों की नौकरी की राह खुलेगी। रीट प्रथम लेवल में देरी के कारण सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की भी मुसीबत बढ़ रही है।

हर बार विवाद, फिर भी कोई सबक नहीं
रीट भर्ती परीक्षा हर बार विवादों में फंसती है। लेकिन सरकार कोई समाधान नहीं निकाल पा रही है। जब से से प्रदेश व आरटेट व रीट परीक्षा की शुरूआत हुई है तब से शिक्षक भर्ती न्यायालय की दहलीज पर ज्यादातर बार पहुंच रही है। हालत यह है कि वर्ष 2016 की शिक्षक भर्ती परीक्षा के जरिए चयनित बेरोजगारों को अब तक नौकरी नहीं मिली है।

इनका कहना है:
भर्ती प्रक्रिया रुकने के बाद सरकार जागती है और उसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट बुलाती है। जबकि सरकार को भर्ती प्रक्रिया कोर्ट में जाते ही सुप्रीम कोर्ट से एडवोकेट बुलाकर विपक्ष को भर्ती प्रक्रिया रोकने का मौका ही नहीं देना चाहिए। इसलिए बेरोजगारों की सरकार से मांग है कि जो हाईकोर्ट में प्रश्नोत्तर मामले को लेकर याचिका लगी है उसका निस्तारण करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट बुलाकर मजबूत तरीके से पैरवी कराई जाए, ताकि बेरोजगारों के सपने नहीं टूटे।
उपेन यादव, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ



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