संदीप हुड्डा
सीकर. प्रदेश के पुलिस थानो में 14 हजार से ज्यादा हथियार कबाड़ बन रहे हैं। ये सभी हथियार चालू हालत में थे लेकिन अब ये कबाड़ बनते जा रहे हैं। ये वे हथियार हैं जिनके लाइसेंसधारियों की मौत हो चुकी है और थानों में जब्त पड़े हैं। करोड़ों रुपए की कीमत के इन हथियारों को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। जिनके हथियार थे उनके वारिसों को कलक्टर आम्र्स लाइसेंस नहीं दे रहे हैं और हथियारों को पुलिस नीलाम नहीं कर रही है।
जानकारी के मुताबिक हथियार लाइसेंसधारी की मौत के बाद उसके हथियार को तुरंत संबंधित पुलिस थाने में जमा करवाना होता है। इस तरह के 14387 हथियार प्रदेश के थानो में जब्त पड़े हैं। करोड़ों रुपए की कीमत के ये हथियार भले ही कबाड़ हो रहें हैं लेकिन इनके निस्तारण को लेकर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। वारिस इन हथियारों को छुड़वा नहीं पा रहे हैं और पुलिस इनको निलाम नहीं कर पा रही है। नतीजतन ये हथियार खराब ही होने हैं।
प्रावधान लेकिन उनके पास लाइसेंस नहीं
आयुध अधिनियम 1959 व आयुध नियम 2016 के तहत शस्त्र अनुज्ञाधारी की मृत्यू के पश्चात उसके विधिक उत्तराधिकारी के नाम शस्त्र अनुज्ञापत्र जारी करने व शस्त्र हस्तांतरण करने की कार्यवाही की जाती है। इसमें सबसे अड़चन यह है कि जिनके नाम अनुज्ञापत्र था उनके वारिसों को लाइसेंस ही नहीं मिलते हैं। इस वजह से हथियार नहीं छुड़़वा पा रहे हैं। कानून में तो यह भी प्रावधान है कि लाइसेंसधारी वृद्ध होने पर भी अपने वारिस के नाम लाइसेंस जारी करवाकर हथियार स्थानंतरण करवा सकता है लेकिन वारिसों को तो लाइसेंस मिल ही नहीं पाता है।
पुलिस भी नहीं कर पाती नीलाम
थानों में पकड़े गए अवैध हथियारों को भी पहले पुलिस नीलाम करवाती थी। ये हथियार वे ही लोग खरीद सकते थे जिनके पास लाइसेंस हो। जिन हथियारों के लाइसेंसधारियों की मौत हो चुकी है उनको पुलिस भी नीलाम नहीं कर पा रही है। जिनके वारिसों के पास लाइसेंस नहीं है उनके हथियार पुलिस निलाम करे तो करोड़ों रुपए आ सकते हैं।
थाने में हथियार जिनके लाइसेंसधारियों की हो चुकी है मौत
कोतवाली : 8
सदर सीकर:4
उद्योग नगर: 1
पाटन: 1
श्रीमाधोपुर: 4
खंडेला: 5
रानोली: 1
खाटूश्यामजी: 1
रींगस: 4
रामगढ़: 3
दादिया: 1
नीमकाथाना: 2
फतेहपुर सदर: 8
नेछवा: 5
एक्सपर्ट व्यू:
लोगों के हथियार कबाड़ हो रहे हैं अगर उनके वारिसों को लाइसेंस मिल जाए तो ऐसा नहीं होगा। जिनके पास लाइसेंस हैं उनको हथियार बेचे जा सकते हैं लेकिन प्रदेश में तो लाइसेंस बन ही नहीं रहे। ऐसे में लोगों के करोड़ों रुपए कबाड़ में जा रहे हैं।
एके जैन, एडवोकेट, राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर





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