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रणथम्भौर में 16 साल में 5 गांव विस्थापित, धीमी गति से हो रहा कार्य, रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान का मामला

सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में वन विभाग की ओर से पिछले 16 साल में 5 गांवों को ही विस्थापित कर पाए है। इनमें करीब 8 सौ परिवारों को विस्थापित कर पैकेज दे दिया गया है। जबकि शेष दो गांव हिन्दवाड़ व मुद्राहेड़ी को विस्थापन करने की प्रक्रिया चल रही है।


विभाग की ओर से विस्थापन की प्रक्रिया धीमी गति से होने से लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। रणथम्भौर वर्ष 2002 से गांवों को विस्थापन की कवायद जारी है।
966 परिवारों को दिया साढ़े 96 करोड़ मुआवजा वन विभाग की ओर से पार्क के रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के अन्दर जीवन यापन करने वाले पांच गांव विस्थापित किए है। इनमें कठूली गांव के 151 परिवार, पादड़ा के 23, मोर डूंगरी के 154, भिड़ 164, कालीभाट के 174 परिवारों को विस्थापति किया गया है। इन परिवार को प्रति परिवार 10 लाख रुपए का पैकेज यानि 96 करोड़ 66 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुक ा है।


दो गांवों का चल रहा विस्थापन
रणथम्भौर पार्क क्षेत्र में बसे गांव हिंदवाड़ व मुद्राहेड़ी का विस्थापन कार्य जारी है। वनाधिकारियों के अनुसार अब तक हिन्दवाड़ में 300 परिवारों का विस्थापन किया जा चुका है, जबकि अभी 200 परिवार शेष है। इसी प्रक ार मुद्राहेड़ी में 70 परिवारों का विस्थापन किया जा चुका है। शेष 70 परिवारों का विस्थापन करना बाकी है।


23 गांवों के विस्थापन का है लक्ष्य
वन विभाग की ओर से आगामी महीनों में करीब 23 गांवों को विस्थापित करने का लक्ष्य है। इनमें इंडाला , मचानकी , पादड़ा , मोरडूंगरी ,कठूली, कालीभाट, मुंद्राहेड़ी, भिड़, हिंदवाड़, हलोंदा, कुशालीपुरा, भैरु पुरा, हज्जामखेड़ी, महुपुरा, बोदल, गढी कालाखेहरा(तालेड़ा), नीमली कलां, जालपाखेड़ी, हरीपुरा, भावपुर, सावटा, खिदरपुर जादौन, भाटपुरा आदि गांवों का विस्थापन किया जाना है।


दस माह पूर्व हुआ था अंतिम विस्थापन
रणथम्भौर पार्क क्षेत्र में करीब दस माह पूर्व गढ़ी, काला खोहरा, तालड़ा आदि गांवों के परिवारों का विस्थापन किया था। लेकिन अभी प्रक्रिया जारी है।


कई परिवार लौट आए
वन विभाग की ओर से विस्थापित किए गए परिवारों में से कई परिवार वापस जंगल में जाकर बस गए है। ऐसे में उन्हें वहां से हटाने के लिए विभाग की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। वनाधिकारियों ने बताया कि विस्थापित किए गए परिवार वापस आकर नहीं बसे है। शिकायत मिली है। संबंधित रेंजर को निर्देशित कर सूचना देने को कहा है।


दो तरह का पैकेज
रणथम्भौर अभयारण्य में दो तरह विस्थापित होने वाले लोगों को दो तरह से विस्थापन पैकेज दिया जाता है। इसमें प्रति परिवार 10 लाख रुपए दिए जाते है। 10 लाख का पैकेज नहींं लेने वाले परिवार को 6 बीघा 7 बिस्बा जमीन उपलब्ध कराते है।

  • रणथम्भौर में बसे गांवों का विस्थापन कार्य जारी है। अब तक छह गांवों को पूर्णतया विस्थापित कर दिया है, जबकि गढ़ी काला, खोहरा, तालेड़ा खेत को शीघ्र विस्थापित किया जाएगा। कैलादेवी अभयारण्य के डंगरा, विश्वनाथपुरा व भीमपुरा विस्थापन प्रक्रिया में है। शेष करीब 20 गांवों को विस्थापित करना विभाग की प्राथमिकता है। ग्रामीणों से समझाइश कर शीघ्र ही उन्हें विस्थापित किया जाएगा। बजट की स्थिति रिकॉर्ड देखने के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
    वाईके साहू, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना सवाईमाधोपुर।


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